Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर में सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं के सामने एक बार फिर पदों की संख्या का सवाल खड़ा हो गया है. बस्तर फाइटर्स में 79 पदों पर भर्ती की घोषणा होते ही बेरोजगार युवाओं ने विरोध का रास्ता अपनाया. सोमवार सुबह आमागुड़ा इलाके में बड़ी संख्या में जुटे युवाओं ने करीब एक घंटे तक नारेबाजी कर अपनी नाराजगी जाहिर की. युवाओं का कहना है कि जिले में बेरोजगारों की संख्या के मुकाबले 79 पद बेहद कम हैं. उनकी मांग है कि भर्ती का दायरा बढ़ाकर स्थानीय युवाओं को ज्यादा अवसर दिए जाएं. दरअसल, गृह विभाग ने फाइटर आरक्षक के 79 पदों के लिए अधिसूचना जारी की है. इनमें 50 पद एसटी, 16bअनारक्षित, 11 ओबीसी और 2 एससी वर्ग के लिए निर्धारित हैं. खास बात यह है कि भर्ती में केवल बस्तर जिले के स्थानीय पात्र युवा ही आवेदन कर सकेंगे. 2 नवंबर से आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसकी अंतिम तारीख 12 दिसंबर 2026 शाम 5 बजे है. अब युवाओं की निगाहें शासन के फैसले पर हैं कि क्या पदों की संख्या बढ़ाकर उनकी मांग को जगह मिलेगी या 79 पदों पर ही भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
दिवाली से पहले पटाखा कारोबार की तैयारी, लॉटरी से तय होंगी दुकानें
जगदलपुर. दीपावली के बाजार में पटाखों की खरीद-बिक्री शुरू होने से पहले प्रशासन ने अस्थायी दुकानों के लिए व्यवस्था तय कर दी है. जगदलपुर के लालबाग मैदान में इस बार पटाखा दुकानों के लिए अस्थायी प्लॉट आवंटित किए जाएंगे. दुकानों के लिए मैदान में शौचालय के पीछे की ओर स्थान निर्धारित किया गया है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवंटन की प्रक्रिया में केवल वैध पटाखा लाइसेंसधारी कारोबारी ही शामिल हो सकेंगे. इसके लिए 3 नवंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक व्यवसायियों को स्वयं उपस्थित होना होगा. आवेदकों को जीवित पटाखा लाइसेंस, आधार कार्ड की मूल प्रति और छायाप्रति साथ लानी होगी. प्रत्येक प्लॉट के आवंटन के लिए निर्धारित शुल्क 12 हजार 100 रुपये जमा करना होगा. इसके बाद उसी दिन दोपहर 3 बजे लॉटरी पद्धति से दुकानों का आवंटन किया जाएगा. कलेक्ट्रेट कार्यालय में दर्ज जीवित लाइसेंसधारियों की सूची में नाम होना अनिवार्य रखा गया है. अब कारोबारियों की नजर लॉटरी पर है, क्योंकि इसी से तय होगा कि किसे लालबाग मैदान में पटाखा कारोबार का मौका मिलेगा.
भिलाई की नई भट्ठी से रावघाट रेललाइन को मिली रफ्तार की उम्मीद
जगदलपुर. भिलाई स्टील प्लांट की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी ने बस्तर की छह दशक पुरानी रेललाइन की मांग को फिर चर्चा में ला दिया है. भिलाई में प्रतिदिन 11 हजार टन हॉट मेटल उत्पादन क्षमता वाला विशाल ब्लास्ट फर्नेस स्थापित किया जा रहा है. इस बढ़ती उत्पादन क्षमता के लिए बड़े पैमाने पर लौह अयस्क की जरूरत होगी, जबकि दल्ली राजहरा की खदानों में अयस्क का भंडार सीमित होता जा रहा है. ऐसे में रावघाट से जगदलपुर तक रेललाइन का विस्तार औद्योगिक जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है. केंद्र सरकार और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की सक्रियता से इस परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी है. लेकिन बस्तरवासियों के लिए असली सवाल सिर्फ खनिज परिवहन का नहीं, बल्कि यात्री सुविधाओं का भी है. क्षेत्र में रावघाट, चारगांव, हाहालद्दी और महामाया जैसी खदानों से अयस्क परिवहन की संभावनाएं जुड़ी हुई हैं. बैलाडीला क्षेत्र में भी एनएमडीसी खनन का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. वहीं दूसरी ओर नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण की चर्चाओं ने स्थानीय औद्योगिक भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है. बस्तर के लोगों का सवाल है कि जब खनिज संपदा से उद्योगों को रफ्तार मिलेगी, तो क्या इस रेललाइन से स्थानीय यात्रियों को भी नियमित ट्रेन सुविधा मिलेगी? क्योंकि छह दशक से इंतजार कर रहे बस्तर को सिर्फ मालगाड़ी की पटरी नहीं, बल्कि यात्री परिवहन का भी अधिकार चाहिए.
Bastar News Update : चक्रवात बदल रहा है, किसानों की मुश्किलें नहीं
जगदलपुर. बस्तर के किसानों के लिए इस खरीफ सीजन में मौसम सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है. एक प्राकृतिक आपदा से उबरने की कोशिश कर रहे किसानों के सामने अब चक्रवात मुरासु ने नई परेशानी खड़ी कर दी है. आसमान में बादलों की आवाजाही और रुक-रुककर हो रही बारिश ने धान कटाई की रफ्तार थाम दी है. कई खेतों में धान पककर तैयार है, लेकिन जमीन में नमी के कारण हार्वेस्टर मशीनें खेतों में नहीं उतर पा रही हैं. वहीं जिन किसानों ने फसल काटकर रखी है, उन्हें बारिश में धान भीगने और खराब होने का डर सता रहा है. इससे पहले इंद्रावती नदी की बाढ़ ने हजारों हेक्टेयर फसल को प्रभावित किया था. इसके बाद लगातार बारिश, कीट प्रकोप और फसल रोगों ने भी किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर की. अक्टूबर के आखिरी दिनों में मौसम खुलने पर किसानों ने कटाई शुरू की थी, लेकिन अब फिर मौसम ने काम रोक दिया है. लोहंडीगुड़ा, बस्तर, तोकापाल और बकावंड के ग्रामीण इलाकों में किसान धूप निकलने का इंतजार कर रहे हैं. किसानों की चिंता सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि धान की गुणवत्ता और बाजार में मिलने वाले भाव पर भी इसका असर पड़ सकता है. लगातार मौसम की मार झेल रहे किसानों के सामने अब अपनी बची हुई फसल को सुरक्षित घर तक पहुंचाने की चुनौती है.
Bastar News Update : जनरेटर मौजूद, फिर भी ऑपरेशन थिएटर अंधेरे में
कोंडागांव. जिला मुख्यालय के मातृत्व एवं शिशु अस्पताल में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर बिजली गुल होने की घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं. अस्पताल में जनरेटर की सुविधा होने के बावजूद बिजली जाने पर ऑपरेशन थिएटर तक वैकल्पिक आपूर्ति नहीं पहुंच सकी. जानकारी के मुताबिक रविवार सुबह करीब 7:30 बजे परिजन एक गर्भवती महिला को अस्पताल लेकर पहुंचे थे. जांच के दौरान चिकित्सकों ने गर्भस्थ शिशु की धड़कन नहीं मिलने और उसकी मृत्यु होने की जानकारी दी. इसके बाद महिला का ऑपरेशन करने की तैयारी शुरू की गई, लेकिन इसी बीच अस्पताल की बिजली गुल हो गई. हैरानी की बात यह रही कि जनरेटर उपलब्ध होने के बाद भी ऑपरेशन थिएटर में बिजली बहाल नहीं हो सकी. परिजनों का आरोप है कि बिजली की समस्या के चलते उन्हें महिला को जगदलपुर ले जाने की सलाह तक दी गई. हालांकि, बाद में बिजली आपूर्ति बहाल होने के बाद महिला का ऑपरेशन किया गया. सीएचएमओ डॉ. आरके चतुर्वेदी के मुताबिक महिला की स्थिति फिलहाल स्वस्थ है. उन्होंने तकनीकी खामी की जांच के लिए इंजीनियर बुलाने और पूरे सिस्टम का परीक्षण कराने की बात कही है. अब सवाल यह है कि आपातकालीन स्थिति में जब ऑपरेशन थिएटर को तत्काल बिजली की जरूरत थी, तब अस्पताल का बैकअप सिस्टम काम क्यों नहीं आया?
Bastar News Update : 9 करोड़ के मोबाइल शौचालय, गांवों में कबाड़ बनकर पड़े
नारायणपुर. अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों में स्वच्छता सुविधा पहुंचाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत इस योजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर रही है. कुकड़ाझोर से आकाबेड़ा मार्ग और ओरछा के अलग-अलग इलाकों में मोबाइल बायो शौचालय बेकार पड़े हुए हैं. जिन चलित शौचालयों से ग्रामीणों को सुविधा मिलने की उम्मीद थी, वे अब खुद सरकारी लापरवाही की तस्वीर बन गए हैं. जानकारी के मुताबिक पिछली सरकार के कार्यकाल में करीब नौ करोड़ रुपये खर्च कर इनकी खरीदी की गई थी. एक मोबाइल बायो टॉयलेट यूनिट की कीमत 6 लाख 13 हजार 600 रुपये बताई गई है. कहीं टायर पंचर हैं तो कहीं जरूरी पुर्जे गायब हैं, जिसके चलते इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अबूझमाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों को जानते हुए इस योजना की व्यावहारिकता का आकलन किसने किया था? जहां गांवों के बीच लंबी दूरी और पहुंच की समस्या है, वहां 30 परिवारों के लिए एक चलित शौचालय कितना कारगर था? वीवीआईपी दौरे के दौरान इन शौचालयों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता रहा, लेकिन बाद में रखरखाव की जिम्मेदारी किसने निभाई, यह स्पष्ट नहीं है. मामले में अब खरीदारी, भुगतान, उपयोगिता और रखरखाव की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है. कलेक्टर नम्रता जैन के सामने भी अब चुनौती है कि सरकारी धन के इस खर्च का हिसाब सामने आए और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो.

Bastar News Update : पटवारियों की हड़ताल से राजस्व व्यवस्था प्रभावित, अब सड़क पर उतरा संघ
जगदलपुर. बस्तर जिले में राजस्व से जुड़े कामकाज पर पटवारियों की हड़ताल का असर लगातार बढ़ता जा रहा है. 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे पटवारियों ने अब अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर शासन का ध्यान खींचा है. 2 नवंबर को राजस्व पटवारी संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में पटवारियों ने कृषि उपज मंडी स्थित धरना स्थल से रैली निकाली. दोपहर 2 बजे शुरू हुई रैली चांदनी चौक से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची. यहां मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन कलेक्टर को सौंपकर लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की गई. पटवारियों की हड़ताल का सीधा असर आम लोगों के राजस्व संबंधी कामों पर पड़ रहा है. आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के लिए जरूरी प्रतिवेदन अटके हुए हैं. वहीं भुइयाँ पोर्टल, डीसीएस और एग्रीस्टैक में अनुमोदन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है. फसल कटाई प्रयोग, टीआरएस पत्रक तैयार करने और शिविर व प्रोटोकॉल ड्यूटी जैसे विभागीय काम भी प्रभावित हैं. संघ का कहना है कि लंबित और न्यायसंगत मांगों पर शासन की ओर से अब तक समाधान नहीं निकल पाया है. ऐसे में अब सवाल यह है कि पटवारियों और शासन के बीच जारी गतिरोध कब खत्म होगा, क्योंकि इसकी कीमत आखिरकार राजस्व कार्यालयों के चक्कर काट रहे आम लोगों को चुकानी पड़ रही है.
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

