Bastar News Update : जगदलपुर। बस्तर मुख्यालय जगदलपुर में श्री अय्यप्पा सेवा संघम का 39वां वार्षिक महोत्सव आस्था के शिखर पर पहुंच गया। शुक्रवार को मंदिर परिसर में वह दुर्लभ क्षण आया, जिसका भक्तों को वर्षों से इंतजार रहता है। गरुड़ दर्शन के साथ पूरा वातावरण स्वामी शरणम अय्यप्पा के जयघोष से गूंज उठा। मान्यता है कि गरुड़ का दर्शन सुख, समृद्धि और मंगल का संकेत होता है। महोत्सव की शुद्धता बनाए रखने के लिए केरल से आए विशेष पुजारियों द्वारा सभी अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं।

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पारंपरिक विधानों के अनुरूप पल्लि उणर्तल, अभिषेक और गणपति होम किए गए। उत्सव बलि पूजा को महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना गया। क्षेत्रीय विधायक किरण देव और महापौर ने भी दर्शन कर आशीर्वाद लिया। जनप्रतिनिधियों ने आयोजन को बस्तर की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बताया। यह मंदिर सबरीमाला के बाद गरुड़ दर्शन की परंपरा निभाने वाला दुर्लभ स्थल माना जाता है। दशकों से चली आ रही यह परंपरा आज भी श्रद्धालुओं को जोड़ रही है। आस्था और परंपरा का यह संगम बस्तर की पहचान को और सशक्त कर रहा है।

निजी स्कूल की कार्यप्रणाली पर सवाल, शिक्षा विभाग की सख्ती तय

बस्तर। बस्तर जिले के कारली क्षेत्र स्थित एक निजी स्कूल की कार्यप्रणाली पर शिक्षा विभाग की जांच ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच समिति की रिपोर्ट में शैक्षणिक और प्रशासनिक स्तर पर कई खामियां सामने आई हैं। विभाग ने स्कूल प्रबंधन और एक शिक्षिका को अलग-अलग नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है। मामला एक पालक की शिकायत से शुरू हुआ, जिसे कलेक्टर ने गंभीरता से लिया। जांच में यह पुष्टि हुई कि विद्यार्थियों से कंप्यूटर फीस ली जा रही है, जबकि सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

प्रायोगिक कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं पाई गईं। कॉपी जांच और शैक्षणिक निगरानी में भी लापरवाही उजागर हुई है। एक शिक्षिका के व्यवहार को लेकर भी शिकायत सही पाई गई। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि जवाब संतोषजनक न होने पर कड़ी कार्रवाई होगी। शिक्षकों की योग्यता की जांच के लिए अलग समिति बनाई जाएगी। विभाग का कहना है कि बच्चों और पालकों के हित सर्वोपरि हैं। नियमों के उल्लंघन पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

आस्था की थाती, दान पेटी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर की दान पेटी से इस बार श्रद्धालुओं की गहरी आस्था सामने आई है। दान गणना के दौरान कुल 19 लाख 44 हजार रुपये नगद चढ़ावा प्राप्त हुआ। गणना प्रक्रिया में प्रशासन और मंदिर समिति के प्रतिनिधि मौजूद रहे। दान पेटी से सोने-चांदी के आभूषण भी प्राप्त हुए। भक्तों द्वारा बड़ी संख्या में मनोकामना पत्र अर्पित किए गए। इन पत्रों में स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा और पारिवारिक सुख की कामनाएं लिखी गईं। कई श्रद्धालुओं ने परीक्षा और भविष्य को लेकर प्रार्थनाएं कीं। मंदिर समिति के अनुसार यह चढ़ावा श्रद्धालुओं की अटूट विश्वास का प्रतीक है। दान का उपयोग मंदिर व्यवस्था और सेवा कार्यों में किया जाएगा। मां दंतेश्वरी बस्तर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान हैं। श्रद्धालुओं का यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर आज भी आस्था का केंद्र बना हुआ है।

किसानों की आवाज सड़क पर, धान खरीदी को लेकर बढ़ा दबाव

बस्तर। गांधी की पुण्यतिथि पर तोकापाल क्षेत्र में किसानों की समस्याएं सड़क तक पहुंच गईं। ब्लॉक और शहर कांग्रेस के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्ग पर सांकेतिक चक्काजाम किया गया। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
किसानों ने धान खरीदी में तकनीकी दिक्कतों का मुद्दा उठाया। कई किसानों के टोकन न कट पाने से उपज नहीं बिक पाई। मनरेगा में बदलाव को लेकर भी नाराजगी जताई गई। प्रदर्शनकारियों ने योजना का नाम यथावत रखने की मांग की। धान खरीदी की तिथि बढ़ाने की मांग प्रमुख रही। नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज होगा। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी। किसानों ने अपनी आवाज मजबूती से दर्ज कराई।

सरकारी स्कूल में धार्मिक प्रतीक का मामला, जांच के घेरे में शिक्षा व्यवस्था

बस्तर। बस्तर जिले के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में धार्मिक प्रतीक मिलने से विवाद गहरा गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया। विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बीईओ कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा संस्थानों को धर्मनिरपेक्ष बनाए रखने की मांग की। ज्ञापन सौंपकर स्कूलों में धार्मिक गतिविधियों पर रोक की मांग की गई। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी स्कूल तटस्थ संस्थान होते हैं। शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीर बताया है। वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है। मामले पर निगरानी रखी जा रही है। जांच रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

जमीन विवाद में किसानों का आरोप, राजस्व तंत्र पर उठे सवाल

सुकमा। सुकमा जिले के मस्तानपारा क्षेत्र में किसानों ने राजस्व अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि जमीन के नक्शे में जानबूझकर बदलाव किया गया। एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए सीमांकन में हेरफेर का आरोप है।
किसानों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की। बताया गया कि वे पिछले 50 वर्षों से भूमि पर खेती कर रहे हैं। 15 दिनों में सीमांकन कर किसानों को अतिक्रमणकारी बताया गया। जबकि किसानों का सीमांकन आवेदन लंबे समय से लंबित है। विवादित भूमि पर खड़ी फसल पर भी संकट मंडरा रहा है। बेदखली से आजीविका पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। किसानों ने भेदभाव का आरोप लगाया है। जांच नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है। प्रशासन पर निष्पक्षता की परीक्षा है।

शिक्षा से बदलाव की मिसाल, बस्तर की शिक्षिका को राष्ट्रीय सम्मान

बस्तर। जगदलपुर की शिक्षिका सविता पिल्लई को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। उन्हें शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर प्रदान किया गया। उन्होंने दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा को सशक्त बनाया। बच्चों में नैतिक मूल्य और जीवन कौशल विकसित करने पर विशेष कार्य किया। उनकी पहल से कई बच्चों को नई दिशा मिली। शिक्षा को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाया गया। सम्मान समारोह राजस्थान के जयपुर में आयोजित हुआ। सेवानिवृत्त सेना अधिकारी द्वारा सम्मान प्रदान किया गया।।यह उपलब्धि बस्तर के लिए गर्व का विषय है। उनका कार्य अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा है। शिक्षा की ताकत को उन्होंने साबित किया है।

मां दंतेश्वरी पर मंडराता खतरा, प्राथमिकता पर उठे सवाल

दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी मंदिर को बाढ़ और कटाव से खतरा बढ़ता जा रहा है। डंकिनी नदी का कटाव अब मंदिर परिसर तक पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर की ओर रिटेनिंग वॉल जरूरी है। इसके बावजूद दीवार दूसरी दिशा में बनाई जा रही है। आरोप है कि इससे औद्योगिक कचरे को बचाया जा रहा है। जबकि मंदिर सुरक्षा के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। एनजीटी ने पहले ही नदी किनारे कचरा हटाने का आदेश दिया था। स्थानीय पुजारियों ने खतरे की चेतावनी दी है। हर बारिश में मंदिर परिसर में पानी भरने की आशंका रहती है। मंदिर केवल इमारत नहीं, बस्तर की आस्था है। समय रहते उपाय नहीं हुए तो नुकसान गंभीर हो सकता है। प्रशासन की प्राथमिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।