Bastar News Update : जगदलपुर. शहर में एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला. ट्यूशन से घर लौट रहा 13 वर्षीय छात्र दक्ष पिल्लई सड़क हादसे का शिकार हो गया. बोधघाट थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. दक्ष अपने माता-पिता की इकलौती संतान था. जिसकी असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.

जानकारी के अनुसार आकाश नगर निवासी पवन पिल्लई का बेटा दक्ष पिल्लई कालीपुर स्थित हेम एकेडमी में कक्षा सातवीं का छात्र था. शनिवार शाम करीब 5 बजकर 45 मिनट पर वह तीन दोस्तों के साथ साइकिल से ट्यूशन से लौट रहा था. एलआईसी रोड पर माहरा समाज भवन के पास पहुंचते ही धरमपुरा की ओर से आ रही तेज रफ्तार सफेद क्रेटा कार ने उसे टक्कर मार दी. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मासूम सड़क पर दूर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया. हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों ने इंसानियत दिखाते हुए तत्काल बच्चे को अस्पताल पहुंचाया.लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. घटना की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई है. इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर शहर की सड़कों पर बेलगाम रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में महाशिवरात्रि की धूम

सुकमा. धुर नक्सल प्रभावित जगरगुड़ा क्षेत्र के अचकट गांव में इस वर्ष महाशिवरात्रि सिर्फ पर्व नहीं. बदलाव का प्रतीक बनी. जिस इलाके की पहचान कभी सन्नाटे से थी. वहां हर-हर महादेव के जयघोष गूंजे. प्राचीन शिव प्रतिमाओं और पुरातात्विक अवशेषों ने आयोजन को ऐतिहासिक आयाम दिया. सुबह से ही आसपास के गांवों से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया. महिलाएं पारंपरिक वेश में पूजा थाल सजाए दिखीं. युवाओं ने मंदिर परिसर संवारा. शाम ढलते ही दीपों की रोशनी ने पूरे गांव को आलोकित कर दिया. रुद्राभिषेक. भजन-कीर्तन और जागरण देर रात तक चलता रहा. ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक नृत्य ने संस्कृति को जीवंत किया. ग्रामीणों का कहना है कि अब भय नहीं, विश्वास लौट रहा है. यह आयोजन सामान्य होती स्थिति का मजबूत संकेत माना जा रहा है. युवाओं ने सोशल मीडिया के जरिए उत्सव को दुनिया तक पहुंचाया. ग्रामीणों ने प्राचीन मूर्तियों के संरक्षण की मांग भी उठाई.

एनीकट से बिना सूचना पानी छोड़ने को लेकर गहराया विवाद

बस्तर. इंद्रावती नदी पर बने एनीकट से बिना सूचना पानी छोड़े जाने पर विवाद गहराया है. इंद्रावती बचाओ संघर्ष समिति ने इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया. आरोप है कि चित्रकोट आयोजन के नाम पर जल छोड़ा गया. पानी छोड़ने से जलस्तर गिरा और सिंचाई संकट बढ़ा. किसानों का कहना है कि धान सहित फसलों पर सीधा असर पड़ रहा है. पहले भी इसी तरह की कार्रवाई से गांवों में नुकसान हुआ था. लिखित सूचना की मांग बार-बार उठाई गई. पर अनदेखी हुई. समिति ने इसे गैर-जिम्मेदाराना निर्णय करार दिया. चेतावनी दी गई कि हालात नहीं सुधरे तो आंदोलन होगा. मांग है कि पानी छोड़ने पर तत्काल रोक लगे. किसानों के साथ समन्वय अनिवार्य किया जाए. प्रशासन से कृषि को प्राथमिकता देने की अपील की गई.

रेलवे की नजर बस्तर पर

बस्तर. विशाल विशाखापट्टनम डिवीजन से अलग होकर रायगढ़ डिवीजन अस्तित्व में आया है. नया डिवीजन आय बढ़ाने के साथ यात्री सुविधाओं पर भी विचार कर रहा है. बंद पड़ी दुर्ग–जगदलपुर इंटरसिटी को फिर शुरू करने पर मंथन है.योजना है कि ट्रेन को जगदलपुर के बजाय किरंदुल से चलाया जाए. तर्क है कि इससे बचेली. भांसी और दंतेवाड़ा क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा. बैलाडीला की लौह अयस्क परियोजनाएं अब इसी डिवीजन के अधीन हैं. यही परियोजनाएं डिवीजन की आय का बड़ा स्रोत बनेंगी. दो निजी कंपनियों के उत्खनन से यात्री दबाव बढ़ने की संभावना है. रेल दोहरीकरण पूरा होने का इंतजार किया जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि बस्तर अब रेलवे की प्राथमिकता में है. स्थानीय लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी की उम्मीद जगी है. फैसले से पहले यात्री सुविधा को आधार बनाने की मांग है.

सूखती जलधाराएं से बढ़ी चिंता

बस्तर. तीरथगढ़ जलप्रपात की जलधारा इन दिनों पतली हो गई है. रबी फसल की सिंचाई के लिए नाले का पानी रोका जा रहा है. इसी कारण हर साल गर्मी में बहाव कम हो जाता है. बस्तर के प्रमुख जलप्रपातों में तीरथगढ़ और चित्रकोट शामिल हैं. बरसात में ये प्रपात पूरे शबाब पर रहते हैं. गर्मी में रौनक फीकी पड़ने लगती है. पर्यटन पर भी इसका असर साफ दिखने लगा है. स्थानीय लोग जल प्रबंधन की जरूरत बता रहे हैं. संतुलन नहीं बना तो प्राकृतिक सौंदर्य खतरे में पड़ सकता है. पर्यटन और खेती के बीच तालमेल जरूरी है. जलधारा संरक्षण पर ठोस नीति की मांग उठी है. नहीं तो आने वाले वर्षों में हालात और बिगड़ सकते हैं.

मौसम में उतार-चढ़ाव का स्वास्थ्य पर असर

बस्तर. मौसम के उतार-चढ़ाव ने वायरल फीवर के मामले बढ़ा दिए हैं. दिन में गर्मी और रात में ठंड शरीर को कमजोर कर रही है. अस्पतालों में रोज 1200 से 1500 मरीज पहुंच रहे हैं. बुखार, सर्दी-खांसी और बदन दर्द की शिकायत आम है. डॉक्टर इसे संक्रमण के लिए अनुकूल मौसम बता रहे हैं. शादी सीजन और देर रात तक जागना जोखिम बढ़ा रहा है. शुगर, बीपी और हृदय रोगियों के लिए खतरा ज्यादा है. बच्चे और बुजुर्ग भी तेजी से चपेट में आ रहे हैं. हल्के लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ रहा है. डॉक्टर सतर्कता और आराम की सलाह दे रहे हैं. संतुलित आहार और पर्याप्त नींद जरूरी बताई गई है. बचाव को ही सबसे बड़ा इलाज माना जा रहा है.

2 साल बाद भी हैंडओवर नहीं हुआ प्री-मैट्रिक छात्रावास

कोंडागांव. ग्राम होनहेड में बना प्री-मैट्रिक छात्रावास दो साल से बनने के बाद शुरू नहीं हो पाया  है. करीब डेढ़ करोड़ की लागत से भवन तैयार किया गया था. निर्माण गुणवत्ता पर आपत्तियों के चलते हैंडओवर नहीं हुआ. बरसात में छत से रिसाव और दीवारों में दरार मिली. आदिवासी विकास विभाग ने भवन लेने से इनकार किया. कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने निरीक्षण किया. जांच के आधार पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई. भवन खाली होने से छात्रों को सुविधा नहीं मिल पा रही. स्थानीय लोग इसे लापरवाही का उदाहरण बता रहे हैं. बच्चों को दूर जाकर पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है. लोगों ने शीघ्र सुधार और उपयोग की मांग की है. जिम्मेदारों पर कार्रवाई की अपेक्षा जताई जा रही है.

एनएच-30: सड़क बनी, सवाल बाकी

कोंडागांव. नगर से गुजरने वाले एनएच-30 की मरम्मत पर सख्त निगरानी है. सड़क की गुणवत्ता पहले से बेहतर बताई जा रही है. लेकिन चौड़ीकरण को लेकर लोगों में असमंजस है. डामरीकरण के बाद मुरूम डालने से धूल की समस्या बढ़ी. ठेले और छोटे दुकानदार विस्थापन को लेकर चिंतित हैं. व्यवस्थित सब्जी बाजार की मांग उठ रही है. शहर में पार्क और गार्डन की कमी भी सवाल बन गई. बच्चों के खेलने की जगह नहीं होने पर नाराजगी है. पंचवटी क्षेत्र अब सुरक्षित माना जा रहा है. लोग विकास चाहते हैं, लेकिन योजना के साथ. धूलस विस्थापन और सुविधा तीनों पर जवाब मांगा जा रहा है. नगर की जरूरतों के अनुरूप समाधान की अपेक्षा है.

भ्रमण से बदली सोच

बस्तर. सीआरपीएफ की 80वीं वाहिनी ने आदिवासी युवाओं को नया अनुभव दिया. दरभा ब्लॉक के संवेदनशील इलाकों से युवाओं को गोवा ले जाया गया. यह कई युवाओं का पहला मौका था जब वे बस्तर से बाहर निकले. नौसैनिक अड्डा और वायुसेना संग्रहालय ने उन्हें प्रभावित किया. सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में युवाओं ने सराहनीय प्रदर्शन किया. भ्रमण से उनकी सोच और आत्मविश्वास में बदलाव आया. युवाओं ने कहा कि दुनिया सिर्फ हमारे गांव तक सीमित नहीं. कार्यक्रम 4 से 10 फरवरी तक चला. समापन पर अनुभव साझा किए गए. अधिकारियों ने युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. सभी प्रतिभागियों को सुरक्षित गांव तक पहुंचाया गया. उद्देश्य युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना, जो साकार होता दिखा.