Bastar News Update : बीजापुर. चार दशक तक जिस जंगल में दाखिल होने से पहले नक्सलियों की इजाजत और निगरानी का सामना करना पड़ता था, अब वहां पर्यटक जंगल की खूबसूरती देखने पहुंचेंगे। बीजापुर के भोपालपटनम ब्लॉक का उलूर-सांड्रा इलाका अब पर्यटन के नए नक्शे पर उभर रहा है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के इस हिस्से में 1 नवंबर से जंगल सफारी की शुरुआत हो चुकी है। कभी नक्सलियों के नाके और उनकी गतिविधियों के कारण यह इलाका आम लोगों की पहुंच से दूर था। डीवीसी मेंबर हूंगा और नागेश की सक्रियता वाले इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों के लिए भी आवाजाही आसान नहीं थी। अब बदले सुरक्षा हालात के बीच वन विभाग ने इस जंगल को पर्यटन से जोड़ने की पहल की है। 2,799.07 वर्ग किलोमीटर में फैले इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, गौर, सांभर और भालू जैसे वन्यजीव मौजूद हैं। शुरुआती चरण में उल्लूर गांव से दंडापार्टी तक करीब 9 किलोमीटर के रूट पर चार जिप्सियों से सफारी कराई जा रही है। वन विभाग ने बफर क्षेत्र में करीब 33 किलोमीटर का सफारी रूट चिह्नित किया है, जहां प्रति वाहन प्रतिदिन 2 हजार रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। स्थानीय छह युवाओं को गाइड और वाहन चालक के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। अब सबसे बड़ी चुनौती पर्यटन के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण को मजबूत करने की होगी। कभी नक्सलियों के नियंत्रण की पहचान रहा उलूर-सांड्रा अब बस्तर में बदलते हालात और पर्यटन की नई संभावनाओं की कहानी लिखने जा रहा है।

सड़क बनी, आवाजाही बढ़ी… लेकिन धरमपुरा से परपा तक गड्ढों ने बढ़ाई लोगों की परेशानी

जगदलपुर. किसी इलाके के विकास की पहचान उसकी सड़कों से होती है, लेकिन सड़क बनने के बाद उसका रखरखाव नहीं हो तो वही सुविधा परेशानी बन जाती है। जगदलपुर में धरमपुरा से कांगोली डोंगरीपारा होते हुए परपा पहुंच मार्ग की मौजूदा स्थिति कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है। इस मार्ग के निर्माण के बाद आसपास के लोगों को आवागमन में सुविधा मिली और वाहनों की आवाजाही भी बढ़ी। लेकिन अब सड़क की बदहाल स्थिति ने इस सुविधा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे उभर आए हैं और कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ चुकी है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा दोपहिया वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। वाहनों को गड्ढों से बचाकर निकालना लोगों की मजबूरी बन गई है। रात के समय रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ते यातायात के बावजूद सड़क के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों ने संबंधित विभाग से मार्ग का निरीक्षण कर जल्द मरम्मत कराने की मांग की है। अब सवाल यह है कि सड़क की हालत और खराब होने से पहले जिम्मेदार विभाग इसकी सुध कब लेगा?

दीपा की मौत के बाद उठे सवाल, बाफना लाइफ स्टाइल के बाहर फूटा परिजनों का गुस्सा

जगदलपुर. एक युवती की संदिग्ध मौत ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं और परिवार न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आया है। जगदलपुर के गोलबाजार स्थित बाफना लाइफ स्टाइल शो रूम में सेल्सगर्ल दीपा सागर की मौत के बाद मंगलवार को तनावपूर्ण स्थिति बन गई। 21 वर्षीय दीपा 21 अक्टूबर से इस प्रतिष्ठान में काम कर रही थी। परिजनों के मुताबिक सोमवार शाम करीब 6 बजे से उसका कोई पता नहीं चल रहा था। देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिवार के लोग उसकी तलाश में दुकान पहुंचे, लेकिन उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। अगले दिन दुकान की छत पर दीपा का शव मिलने की सूचना से परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने सीसीटीवी फुटेज दिखाने में देरी और दुकान प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। शव देखने के बाद शरीर पर चोट और नाखून के निशान होने की बात भी परिजनों ने कही है। इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर परिवार मौत को सामान्य आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जता रहा है। मंगलवार को परिजनों और वार्डवासियों ने प्रतिष्ठान का घेराव किया, इस दौरान गमले तोड़े गए और शटर पर पथराव भी हुआ। स्थिति संभालने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। अब पुलिस के सामने सीसीटीवी, फॉरेंसिक साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत की असल वजह सामने लाने की चुनौती है।

मौसम की मार से थमी धान कटाई, मक्का और सब्जियों पर भी मंडराया नुकसान का खतरा

जगदलपुर. खेतों में फसल तैयार है, किसान कटाई की तैयारी में हैं, लेकिन आसमान से बरसती बूंदें उनकी मेहनत को घर तक पहुंचने से रोक रही हैं। चक्रवाती तूफान मुरासु के प्रभाव से बस्तर संभाग में पिछले दो दिनों से मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। मंगलवार सुबह भी संभाग के कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश होती रही। लगातार नमी के कारण खेतों में धान की कटाई प्रभावित हो रही है, वहीं मक्का की तुड़ाई भी अटक गई है। जिन किसानों ने धान काट लिया है, उनके सामने कटी फसल को बारिश से बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। मौसम की मार अब केवल धान और मक्का तक सीमित नहीं रही, सब्जी उत्पादक किसान भी चिंतित हैं। लगातार बारिश से सब्जियों की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। यदि यही स्थिति बनी रही तो बाजार में सब्जियों की आवक घट सकती है और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और कोंडागांव जिले के लिए भारी बारिश की आशंका जताते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। अगले 24 घंटे किसानों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि खेतों में खड़ी और कटी दोनों तरह की फसलें जोखिम में हैं। अब किसानों को मौसम साफ होने का इंतजार है, ताकि समय रहते अपनी सालभर की मेहनत को सुरक्षित घर पहुंचा सकें।

छोटेडोंगर के किसानों पर दोहरी मार, पहले बाढ़ और अब बेमौसम बारिश ने बढ़ाई चिंता

नारायणपुर. सालभर की मेहनत के बाद जब खेतों में धान पककर तैयार हुआ तो किसानों को उम्मीद थी कि इस बार फसल घर पहुंचेगी, लेकिन मौसम ने एक बार फिर उनकी चिंता बढ़ा दी है। नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर क्षेत्र में किसान पहले बाढ़ से हुए नुकसान का दर्द झेल रहे हैं। अब बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी पकी धान की फसल पर नया संकट खड़ा कर दिया है। लगातार बारिश से धान की फसल गिरने, गुणवत्ता खराब होने और कटाई में देरी की आशंका बढ़ गई है। किसानों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि खेतों में तैयार फसल को समय पर काटकर सुरक्षित कैसे रखा जाए। खेती के लिए खाद, बीज और अन्य संसाधनों पर पहले ही बड़ी रकम खर्च हो चुकी है। कई किसानों के सिर पर कृषि ऋण चुकाने की जिम्मेदारी भी है। ऐसे में यदि बची हुई फसल भी खराब होती है तो परिवारों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का वास्तविक आकलन होना जरूरी है। प्रशासन से मांग है कि प्रभावित खेतों का सर्वे कराकर पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा और राहत दी जाए। फसल बीमा और कृषि ऋण के मामलों में भी प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के लिए पहल होनी चाहिए। फिलहाल छोटेडोंगर के किसान आसमान साफ होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन बड़ा सवाल है कि उनकी सालभर की मेहनत और कर्ज की चिंता का समाधान कब होगा?

पूर्व सरपंच गोविंद नेताम हत्याकांड में पत्नी गिरफ्तार, बेड़मा से पुलिस ने पकड़ा

कोंडागांव. पूर्व सरपंच गोविंद नेताम की हत्या के मामले में पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए उनकी पत्नी भगनी नेताम को गिरफ्तार किया है। थाना क्षेत्र के ग्राम अरंडी में गोविंद नेताम की उनके ही घर में धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद आरोपी महिला फरार हो गई थी, जिसके बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। जांच के दौरान पुलिस को मृतक की पत्नी भगनी नेताम की भूमिका संदिग्ध लगी। लगातार पतासाजी के बाद पुलिस ने बेड़मा में घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। एसडीओपी अरुण नेताम ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच की। पुलिस के मुताबिक पूछताछ और विवेचना में सामने आया कि गोविंद नेताम पर धारदार हथियार से हमला उनकी पत्नी ने ही किया था। ग्रामीणों के अनुसार भगनी नेताम पिछले करीब तीन वर्षों से गोविंद नेताम के साथ रह रही थी। ग्रामीणों ने महिला के शराब सेवन करने की बात भी कही है, वहीं पुलिस के मुताबिक वह पहले अपने पूर्व पति की हत्या के मामले में भी जेल जा चुकी है। हालांकि वर्तमान हत्याकांड के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस अब हत्या के कारणों और घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है, जिसके बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

जमीन के पट्टों पर बड़ा सवाल, 5 नवंबर को हड़मा स्टेडियम में जुटेगा बस्तरिया राज मोर्चा

सुकमा. जिस जमीन पर पीढ़ियों से खेती कर रहे ग्रामीणों को अपने ही अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, अब वही मुद्दा सुकमा में बड़े आंदोलन की वजह बनने जा रहा है। बस्तरिया राज मोर्चा ने 5 नवंबर को जिला मुख्यालय स्थित हड़मा स्टेडियम में जिला स्तरीय धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। मोर्चा का आरोप है कि जिले के कई गांवों में मूल निवासियों की पुश्तैनी खेती की जमीन पर बाहरी लोगों के नाम से पट्टे दर्ज हैं। इन कथित फर्जी पट्टों को निरस्त कर वास्तविक कब्जाधारी किसानों को वैध पट्टा देने की मांग उठाई जाएगी। मोर्चा की जिला कमेटी प्रभारी रामा सोड़ी के मुताबिक सुकमा, छिंदगढ़ और कोंटा तीनों ब्लॉकों में आंदोलन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। छिंदगढ़ के मिचवार, पाईकपारा, गरीपाल और कुन्ना सहित कई गांवों में ऐसी शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। सुकमा ब्लॉक के सोनाकुकानार, गिरदालपारा, केरलापाल और चिकपाल सहित अन्य गांवों के नाम भी सूची में शामिल हैं। वहीं कोंटा ब्लॉक के मुकरम, चिंतलनार, चिमलीपेंटा, गगनपल्ली और मेहता सहित कई गांवों में भी पट्टों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मोर्चा ने ग्रामीणों से जमीन के पुराने और मौजूदा राजस्व रिकॉर्ड जुटाने की अपील की है। आंदोलन में वनभूमि के पट्टे, कथित फर्जी पट्टों को निरस्त करने और पीढ़ियों से खेती कर रहे मूल निवासियों को अधिकार देने की मांग रखी जाएगी। अब 5 नवंबर के प्रदर्शन में यह मुद्दा कितना बड़ा रूप लेता है और प्रशासन इन शिकायतों पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

राम वन गमन पथ का बदल सकता है नक्शा, ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर नए सिरे से बनेगी योजना

जगदलपुर. भगवान राम के वनवास से जुड़ी मान्यताओं और बस्तर की ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने वाली राम वन गमन पथ परियोजना अब नए सिरे से तैयार हो सकती है। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना के मार्ग चयन और खर्च को लेकर विवाद उठे थे। अब भाजपा सरकार परियोजना को ऐतिहासिक, पुरातात्विक और धार्मिक प्रमाणों के आधार पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पर्यटन विभाग ने दूसरे चरण के लिए नई कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में गठित समिति की रिपोर्ट को आधार बनाया जाएगा। इस समिति ने भगवान राम के वनगमन मार्ग से जुड़े स्थलों का अध्ययन किया था। बस्तर संभाग में कांकेर के रामपुर जुनावनी, केशकाल और गढ़धनोरा को इस मार्ग से जोड़ने की बात है। इसके अलावा चित्रकोट, रामपाल, तीरथगढ़ और कोटमसर की गुफा भी प्रस्तावित स्थलों में शामिल हैं। दंतेवाड़ा में बारसूर और मां दंतेश्वरी मंदिर तथा सुकमा में रामाराम और इंजरम को भी इस परिपथ से जोड़ने की योजना है। पूर्व में मार्ग चयन और करोड़ों रुपये के खर्च को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिनकी जांच कराने का निर्णय भी लिया गया है। अब पर्यटन विभाग संशोधित प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजेगा। बड़ा सवाल यह है कि नई योजना में ऐतिहासिक तथ्यों को कितनी प्राथमिकता मिलती है और बस्तर के इन धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटन के लिहाज से कितना विकसित किया जाता है।

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