Bastar News Update : बस्तर. डिमरापाल स्थित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में शुक्रवार को पूजा-पाठ के साथ मॉकड्रिल कर व्यवस्थाओं का प्रदर्शन किया गया. मॉकड्रिल में पंजीयन, ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं की प्रक्रिया दिखाई गई. हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल अब भी विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव से जूझ रहा है. 12 विभाग घोषित किए गए, लेकिन मॉकड्रिल के दौरान सिर्फ 6 विभागों के 8 डॉक्टर ही ओपीडी में मौजूद रहे. इनमें से अधिकांश डॉक्टर केवल एक दिन के लिए बाहर से बुलाए गए थे.

बताया जा रहा है कि अधिकतर डॉक्टर अगले एक-दो दिनों में वापस लौट जाएंगे. अस्पताल में मशीनों और उपकरणों की टेस्टिंग अब भी अधूरी है. प्रबंधन के अनुसार, ट्रायल और जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने में पखवाड़ेभर का समय लगेगा. इस दौरान आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी. मॉकड्रिल के समय अस्पताल को नई एंबुलेंस और वाहन भी उपलब्ध कराए गए. गवर्निंग कमेटी की बैठक में संचालन को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए.लेकिन सवाल यह है कि बिना पूरी तैयारी इलाज कब शुरू होगा? फिलहाल सुपर इलाज बस्तर के लोगों की पहुंच से दूर नजर आ रहा है.

बस्तर – सड़क हादसा, लापरवाही ने ली बड़ी दुर्घटना की शक्ल

शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर घाटलोहंगा के पास शुक्रवार सुबह बड़ा हादसा होते-होते टल गया. सड़क किनारे खड़े टिप्पर से एक कार जा टकराई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार तीन बार घूमते हुए सड़क पर रुक गई. हादसे में कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. कार चालक बाल-बाल बचा और उसे मामूली चोटें आईं. मिली जानकारी के अनुसार चालक सोनारपाल निवासी युवक है. वह अपने रिश्तेदार को जगदलपुर छोड़कर वापस लौट रहा था. घटना स्थल पर खड़े भारी वाहनों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे खड़े वाहनों से पहले भी हादसे हो चुके हैं. हादसे के बाद कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ. स्थानीय लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है. प्रशासन से सड़क किनारे खड़े वाहनों पर कार्रवाई की मांग उठी है.

बस्तर – आकाश छिकारा ने संभाला बस्तर कलेक्टर का पद

बस्तर जिले को नया कलेक्टर मिल गया है. आकाश छिकारा ने शुक्रवार को विधिवत पदभार ग्रहण किया. पदभार संभालने के बाद उन्होंने पत्रकारों से संवाद कर प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं. कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता होंगे. ग्राम स्तर तक प्रशासन को मजबूत करने पर विशेष फोकस रहेगा. उन्होंने कहा कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा. दंतेवाड़ा में कार्य का अनुभव बस्तर के विकास में मददगार होगा. अधूरी योजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करने की बात कही गई. स्थानीय संस्कृति और जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास कार्य होंगे. कलेक्टर ने अधिकारियों को जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश दिए. लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई. पदभार ग्रहण के बाद वरिष्ठ अधिकारियों से परिचय बैठक हुई. प्रशासनिक टीम के साथ समन्वय पर जोर दिया गया.

बस्तर – धार्मिक आयोजन से सांस्कृतिक एकता का संदेश

संतोषी वार्ड स्थित बाबा रामदेव मंदिर में माघ मेला शुरू हो गया है. 20 जनवरी से चल रहे इस आयोजन में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है. इस वर्ष पहली बार राजस्थान की प्रसिद्ध कथावाचक आशा वैष्णव कथा सुनाएंगी. 28 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम में दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचेंगे. मंदिर समिति ने बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना जताई है. कार्यक्रम मंदिर प्रांगण में आयोजित किया जाएगा. कथा रात 9 बजे से शुरू होगी. अगले दिन शोभायात्रा निकाली जाएगी. शहर के विभिन्न इलाकों से होकर यात्रा वापस मंदिर पहुंचेगी. इसके बाद भंडारे का आयोजन होगा. महिलाओं की भजन संध्या और अंताक्षरी भी आयोजित की गई. अखंड परिक्रमा और भजन संध्या मुख्य आकर्षण रहेंगे. आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.

कोंडागांव – घटिया साड़ी वितरण और ऑनलाइन अटेंडेंस के आदेश से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में आक्रोश

कोंडागांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आक्रोश सामने आया है. घटिया साड़ी वितरण और मोबाइल आदेश के विरोध में कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं. महिला कर्मचारियों ने स्तरहीन साड़ियां प्रशासन को दिखाईं. कार्यकर्ताओं का कहना है कि साड़ियां कुछ दिनों में खराब हो जाती हैं. इससे उनका आत्मसम्मान आहत हो रहा है. जिले में 3600 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं. नए आदेश के तहत रोज मोबाइल से हाजिरी और फोटो अपलोड अनिवार्य किया गया है. कार्यकर्ताओं ने बताया कि पुराने मोबाइल खराब हो चुके हैं. कई कार्यकर्ताओं के पास मोबाइल ही नहीं है. 10 हजार के मानदेय में इंटरनेट खर्च वहन करना मुश्किल बताया गया. कार्यकर्ताओं ने सुविधाएं देने की मांग की. मांगें नहीं माने जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई. प्रशासन ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

बस्तर – गर्मी से पहले ही सूखती जीवनरेखा

बस्तर की प्राणदायिनी इंद्रावती नदी में जल संकट गहराने लगा है. गर्मी शुरू होने से पहले ही नदी का जलस्तर 2.42 मीटर रह गया है. चित्रकोट और आसपास के क्षेत्रों में जलधारा काफी कम हो गई है. नदी पर बने एनीकटों में भी पानी बेहद कम मात्रा में फ्लो हो रहा है. पिछले साल नदी पूरी तरह सूख गई थी. इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच जल समझौते के बावजूद पानी नहीं मिल पा रहा. अप्रैल-मई में हालात और बिगड़ने की आशंका है. दर्जनों गांव निस्तारी और सिंचाई के लिए इंद्रावती पर निर्भर हैं. इंद्रावती विकास प्राधिकरण भी अब तक प्रभावी साबित नहीं हुआ. एनीकट स्थायी समाधान नहीं बन पा रहे हैं. सरकार से ठोस पहल की मांग उठ रही है. नदी बचाने को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है.

सुकमा – गांव की सुरक्षा या नई व्यवस्था?

छिंदगढ़ ब्लॉक की चिऊरवाड़ा पंचायत में गांव में प्रवेश पर शुल्क लगाया गया है. बाहरी लोगों से एंट्री चार्ज वसूला जा रहा है. बाइक से आने वालों से 10 रुपए और चारपहिया से 50 रुपए लिए जा रहे हैं. गांव के प्रमुख मार्गों पर नाके लगाए गए हैं. यह व्यवस्था दिसंबर 2025 से लागू है. पंचायत का कहना है कि फैसला ग्राम सभा की सहमति से लिया गया. हर घर से पहरेदारी की ड्यूटी तय की गई है. 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे सुरक्षा मजबूत हुई है. खनिज सर्वे के कारण बाहरी आवाजाही बढ़ी थी. सरपंच ने इसे पेसा कानून के तहत लिया गया निर्णय बताया. पंचायत को आय का स्रोत भी मिलेगा. गांव में मावा नाटे-मावा राज के तहत 6 नियम लागू किए गए हैं.

बस्तर – जलवायु परिवर्तन से जंगल की कमाई ठप

बस्तर में इस साल महुआ फूल का उत्पादन प्रभावित हुआ है. हर साल इस समय महुआ फूल गिरना शुरू हो जाता था. लेकिन इस सीजन में अब तक महुआ फूल नहीं लगा है. ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है. महुआ और इमली ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख साधन हैं. ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि बारिश नहीं होने से कली नहीं आई. महुआ फूल के लिए समय पर बारिश जरूरी होती है. इस बार एक बार भी बारिश नहीं हुई. वनों का घटता रकबा भी इसका कारण माना जा रहा है. इमली की आवक तो संभव है, लेकिन महुआ पर संकट है. पिछले साल भी देरी से महुआ गिरा था. फूड ग्रेड महुआ योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई. ग्रामीण अब मौसम पर निर्भर उम्मीद लगाए बैठे हैं.