बेगूसराय। जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मोख्तियारपुर पंचायत के भावा बहियार में गुरुवार की दोपहर प्रकृति और बिजली विभाग की लापरवाही ने मिलकर किसानों पर कहर बरपा दिया। एक जर्जर ट्रांसफार्मर से निकली छोटी सी चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और करीब 30 से 35 बीघा में लहलहाती गेहूं की फसल को राख के ढेर में तब्दील कर दिया। इस घटना के बाद प्रभावित किसानों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है।

​पछुआ हवा ने आग में डाला घी का काम

​दोपहर का समय था और पछुआ हवा अपनी पूरी रफ्तार पर थी। इसी बीच खेत के समीप लगे एक पुराने विद्युत ट्रांसफार्मर में अचानक जोरदार शॉर्ट सर्किट हुआ। उससे निकली आग की चिंगारियां सीधे सूखी गेहूं की फसल पर जा गिरीं। भीषण गर्मी और तेज हवा के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में भयावह रूप ले लिया। आग की लपटें और धुएं का गुबार इतना ऊंचा था कि बदिया, विशनपुर और मोख्तियारपुर जैसे पड़ोसी गांवों के लोग भी दहशत में आ गए।

​ग्रामीणों का अदम्य साहस और संघर्ष

​आग की सूचना मिलते ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और किसान घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। लपटें इतनी तेज थीं कि पास जाना जान जोखिम में डालने जैसा था, लेकिन ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी। किसी ने अपनी बोरिंग चालू कर पानी की बौछारें की, तो कोई मिट्टी और हरे पेड़ों की टहनियों से आग को दबाने की कोशिश में जुट गया। ग्रामीणों के इसी सामूहिक प्रयास ने आग को आगे बढ़ने से रोका।

​प्रशासन की देरी और दमकल की कार्रवाई

​घटना की जानकारी डायल-112 और भगवानपुर पुलिस के साथ-साथ अग्निशमन विभाग को दी गई। हालांकि, जब तक दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, तब तक साहसी ग्रामीणों ने आग पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया था। बाद में दमकल कर्मियों ने पूरी तरह कूलिंग ऑपरेशन चलाकर बची हुई चिंगारियों को शांत किया ताकि आग दोबारा न भड़के।

​बटाईदार किसानों की टूटी कमर

​स्थानीय पंचायत समिति सदस्य उमेश दास ने बताया कि यदि ग्रामीण तत्परता नहीं दिखाते, तो यह आग दूसरे बहियारों तक फैल सकती थी, जिससे सैकड़ों बीघे का नुकसान हो सकता था। सबसे दुखद पहलू यह है कि प्रभावित किसानों में से 90 प्रतिशत बटाईदार या ठेका पर खेती करने वाले गरीब किसान हैं। इन्होंने कर्ज लेकर और रात-दिन एक कर फसल तैयार की थी, जो अब मिट्टी में मिल चुकी है।

​मुआवजे की मांग और विभाग पर आक्रोश

​ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से अविलंब क्षति का सर्वे कराकर उचित मुआवजे की मांग की है। किसानों का सीधा आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही, जर्जर तार और समय पर मेंटेनेंस न होने के कारण यह हादसा हुआ है। पीड़ित किसानों का कहना है कि अब उनके पास साल भर के दाने और कर्ज चुकाने का कोई जरिया नहीं बचा है।