दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के जंगलों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला वन विभाग आज खुद कटघरे में खड़ा है। नर्मदापुरम के सिवनी बानापुरा रेंज में सागौन की बेशकीमती लकड़ियों की जो लूट मची उसने विभाग की साख को तार-तार कर दिया है, लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब अवैध कटाई की जांच करने निकले अफसरों ने कानून को ताक पर रखकर अपने ही कर्मचारियों को थर्ड डिग्री दे डाली।
दफ्तर बुलाकर बेरहमी से पीटा
दरअसल, खोरा सर्किल में सक्रिय वन माफियाओं ने विभाग की नाक के नीचे करीब 200 सागौन के पेड़ों को जमींदोज कर दिया। जब इस महाघोटाले की गूंज मुख्यालय तक पहुंची, तो हड़कंप मच गया। एसडीओ अनिल विश्वकर्मा और रेंजर जान सिंह पवार मौके पर तो पहुंचे, लेकिन जांच का जो तरीका अपनाया गया, उसने महकमे को शर्मसार कर दिया। आरोप है कि पूछताछ के नाम पर पहले दो चौकीदारों को उठाया गया और फिर बुधवार शाम सुखतवा सर्किल के नाकेदार महिपाल सिंह यादव और रूपेश साहू को दफ्तर बुलाकर बेरहमी से पीटा गया।
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पीड़ित महिपाल यादव ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि एसडीओ अनिल विश्वकर्मा ने उन पर डंडे से हमला किया। वरिष्ठ अधिकारी की इस गुंडागर्दी से आहत होकर कर्मचारी ने सीधे सिवनी मालवा थाने का दरवाजा खटखटाया। थाना प्रभारी सुभाकर बारस्कर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित का मेडिकल करवाया है और पुलिस अब इस विभागीय मारपीट की गुत्थी सुलझाने में जुट गई है।
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DFO ने कही ये बात
इस मामले पर डीएफओ गौरव शर्मा का रुख सख्त है। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि वनरक्षक और वनपाल खुद पिकअप में भरकर सरकारी लकड़ी प्राइवेट लोगों को बेच रहे हैं। जांच में 120 से ज्यादा ठूंठ मिले हैं। डीएफओ का कहना है कि जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है, वही मारपीट का शोर मचा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर मारपीट हुई है, तो उसकी भी जांच होगी। बड़ा सवाल तो यह है कि करोड़ों की अवैध कटाई का मुख्य सूत्रधार कौन है ? क्या मारपीट का ड्रामा असली मुद्दे यानी जंगल की लूट को दबाने के लिए किया जा रहा है या फिर अफसरों ने वाकई अपनी नाकामी छिपाने के लिए मातहतों पर हाथ उठाया है?

