अतीश दीपंकर, भागलपुर। महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर देश भर में जहां उनके विचारों को याद किया गया, वहीं भागलपुर से एक बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आई है। महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और शांति के संदेशों को आत्मसात करते हुए भागलपुर के शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर बिहार सरकार की सुधारवादी नीति के तहत लंबी सजा काट चुके और उत्तम आचरण वाले 4 बंदियों को कारा मुक्त किया गया, जिससे उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है।

​प्रभात फेरी और माल्यार्पण से हुई दिन की शुरुआत

​कार्यक्रम की शुरुआत अहले सुबह बंदियों द्वारा निकाली गई एक प्रेरणादायक प्रभात फेरी से हुई। हाथों में तख्तियां लिए और गांधी जी के विचारों के नारे लगाते हुए बंदियों ने कारा परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। इसके पश्चात, मध्याह्न बेला में कारा प्रशासन और बंदियों ने मिलकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके योगदान को नमन किया।

​वैचारिक प्रतियोगिताओं का आयोजन और संकल्प

​इस विशेष अवसर पर केवल औपचारिकताएं ही नहीं हुईं, बल्कि बंदियों के मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए विशेष कार्यक्रम भी रखे गए। महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन, उनके सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों तथा सदाचार के महत्व पर वाद-विवाद और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
​इन प्रतियोगिताओं में बंदियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान कारा के पदाधिकारियों और सभी बंदियों ने मिलकर गांधीजी के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में उतारने और एक बेहतर इंसान बनने का दृढ़ संकल्प लिया।

​बिहार सरकार की योजना के तहत 4 बंदी हुए रिहा

​गांधी जयंती के खास मौके पर बिहार सरकार की उस कल्याणकारी योजना के तहत एक बड़ा कदम उठाया गया, जिसके अंतर्गत लंबे समय से सजा काट रहे अच्छे आचरण वाले कैदियों को राहत दी जाती है। इसी विशेष प्रावधान के तहत शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा से चार ऐसे बंदियों को रिहा किया गया, जिन्होंने कारावास के दौरान अपने व्यवहार में सुधार का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया था।
​कारामुक्त होने वाले इन चारों बंदियों के नाम हैं:

  • ​पंकज गुप्ता
  • ​दिलीप कुमार चतुर्वेदी
  • ​राम इकबाल सिंह
  • ​दिनेश तांती

​समाज की मुख्यधारा में लौटने की शुभकामनाएं

​बंदियों की रिहाई के इस भावनात्मक क्षण पर कारा प्रशासन ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि ये सभी बंदी समाज की मुख्यधारा में दोबारा पूरी तरह और सकारात्मकता के साथ शामिल होंगे। एक नया और सफल जीवन जीते हुए वे अपने परिवार और समाज के विकास में अपनी सार्थक भूमिका निभाएंगे।