हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर शहर के निपानिया स्थित भवंस प्रॉमिनेंट स्कूल को लेकर एक पूर्व फुटबॉल कोच ने गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रभु नगर निवासी अक्षत का दावा है कि स्कूल में फुटबॉल कोच के पद पर काम करने के बावजूद उन्हें वर्ष 2026 में बिना पूर्व सूचना के पद से हटा दिया गया। इतना ही नहीं, जब उन्होंने अपनी कथित बकाया तनख्वाह के करीब 51,100 रुपये मांगे, तो उन्हें स्कूल परिसर में प्रवेश करने से भी रोक दिया गया।

अक्षत के मुताबिक, उन्होंने इस मामले में पुलिस के कार्यालयों और श्रम आयुक्त कार्यालय में शिकायत की, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी पड़ी। अब मामला स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली के साथ-साथ संबंधित विभागों की कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, इस पूरे मामले में फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप सामने आए हैं। स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभागों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

नवंबर 2024 से कर रहे थे काम, 2026 में हटाने का आरोप

शिकायतकर्ता अक्षत के अनुसार, वह नवंबर 2024 से भवंस प्रोमिनेंट स्कूल में फुटबॉल कोच के पद पर कार्यरत थे। उनका आरोप है कि वर्ष 2026 में स्कूल प्रशासन ने उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के पद से हटा दिया। अक्षत का कहना है कि उन्हें हटाने की प्रक्रिया और उसके पीछे के कारणों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने इस फैसले का विरोध करते हुए स्कूल में किए गए काम के बदले बकाया वेतन की मांग की।

51,100 के बकाया वेतन को लेकर विवाद

अक्षत का कहना है कि स्कूल प्रबंधन के पास उनका करीब 51,100 रुपये का वेतन बकाया है। उनका कहना है कि जब उन्होंने इस राशि का भुगतान मांगा, तो उन्हें स्कूल परिसर में प्रवेश करने से मना कर दिया गया। अब इस मामले में कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में कोच का वेतन बकाया है? यदि बकाया है, तो भुगतान क्यों नहीं हुआ? और यदि उन्हें पद से हटाया गया, तो क्या नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई थी? इन सवालों का जवाब स्कूल प्रबंधन के पक्ष और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

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