शिखिल ब्यौहार, भोपाल। राजधानी की पहचान और लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब के खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र सामने आया है। प्रस्तावित भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट में बड़े तालाब के 3.16 वर्ग किलोमीटर हिस्से को ही नक्शे से गायब कर दिया गया है।

मास्टर प्लान 2047 के नक्शे में बड़े तालाब का कुल क्षेत्रफल 36.3 वर्ग किलोमीटर दिखाया गया है, जबकि सरकार की ही बॉडी भोज वेटलैंड अथॉरिटी ने कई सर्वे के बाद इसकी परिधि 39.47 वर्ग किलोमीटर निर्धारित की हुई है। यानी सीधे तौर पर तालाब की जमीन को कागजों में छोटा कर दिया गया। यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी मास्टर प्लान के नाम पर बड़े तालाब की जमीनों को लेकर ऐसे ही खेल किए गए हैं।

दरअसल, बड़े तालाब के किनारे बेशकीमती जमीनें हैं। आरोप है कि इन जमीनों पर कई मंत्रियों, नेताओं और बड़े अधिकारियों के नाम दर्ज हैं। इन्हीं जमीनों को बड़े तालाब की जद और प्रतिबंध से बाहर निकालने के लिए तालाब का रकबा ही कम दिखा दिया गया, ताकि करोड़ों की जमीनें वैध हो जाएं और निर्माण की छूट मिल सके।

अर्बन एक्सपर्ट कमल राठी ने बताया कि बड़े तालाब के संरक्षण के लिए कवायद की जानी थी, तालाब के कैचमेंट, ग्रीन लैंड को संरक्षित किया जाना था। लेकिन बड़ा तालाब से लगी करोड़ो – अरबों की बेशकीमती जमीनों के लिए संभवतः ऐसा प्रावधान किया गया है। पहले भी कई बार सर्वे समेत पूर्व के मास्टर प्लान में कई षड्यंत्र किए गए थे। मामले में आपत्ति दर्ज कराई जाएगी।

मामले को लेकर अब सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता शहरयार खान ने कहा कि ऐसा एक भी मास्टर प्लान नहीं आया जिसमें बड़े तालाब पर षड्यंत्र ना किया गया हो। उन्होंने मामले पर सरकार से गायक की गई तीन दशमलव एक छह वर्ग किलोमीटर जमीन में मलिक आना हक और निर्माण के जांच की मांग की है। साथ ही साथ प्रावधानों को बदलने के लिए आंदोलन की चेतावनी दी। वही भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सत्येंद्र जैन ने कहां की तलब संरक्षण के लिए हर स्तर पर सरकार वचनबद्ध है। दावे आपत्ति की प्रक्रियाओं के दौरान इसे सुधार भी किया जाएगा।

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