शिखिल ब्यौहार, भोपाल। Bhopal Master Plan 2047 : भोपाल के नए प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 का नक्शा जारी हो गया है। अब दावे आपत्ति की प्रक्रिया शुरू होगी। दावे आपत्ति के बाद TNCP अगर आवश्यक लगा तो संशोधन करेगा, फिर अंतिम ड्राफ्ट जारी होगा। मास्टर प्लान में हाई FAR मतलब गगन चुंबी इमारत निर्माणों पर जोर  दिया गया है। 

ग्रीन जोन एरिया 16% से बढ़ाकर 27% करने का प्रावधान किया गया है। TOD नीति के आधार पर मिक्स लैंड यूज का प्रावधान है। ग्रीन TDR का भी प्रावधान किया गया है। पार्किंग पॉलिसी भी नए मास्टर प्लान में प्रस्तावित है। प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 की आधारभूत संरचना है।

ओल्ड सिटी के डेवलपमेंट प्लान को रखा अलग

आवासीय क्षेत्र को  पांच जोन में बांटा गया है। कमर्शियल लैंड इस्तेमाल के तीन सेंटर बनाए गए हैं। स्पेशल प्लानिंग के लिए अलग जोन बनाया गया है। इंडस्ट्रियल एरिया के लिए दो जोन बनाए गए हैं। पब्लिक यूटिलिटी के लिए अलग जोन बनाया गया। PSP लैंड यूज के आधार पर संशोधित प्रावधान किए गए। तालाब से प्रभावित क्षेत्र के तीन अलग-अलग जोन बनाए गए हैं। ओल्ड सिटी के डेवलपमेंट प्लान को अलग रखा गया है। सिटी फॉरेस्ट, जियोलॉजिकल स्पेस, बोटैनिकल गार्डन का जोन भी अलग बनाया गया है।

बड़ा तालाब का बदला नाम

प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 में बड़ा तालाब का नाम भी बदला है। भोजताल के नाम से बड़े तालाब को पहचान दी गई है। पहले के मास्टर प्लान में तालाबों को क्रमांक और अलग-अलग रंगों से मास्टर प्लान में स्थान दिया जाता था। प्रस्तावित मास्टर प्लान में भोज ताल के लिए तीन जोन बनाए गए हैं। इस बार के प्रस्तावित मास्टर प्लान में यह नया प्रयोग किया गया है।

मास्टर प्लान में मिक्स लैंड यूज और हाई डेंसिटी डेवलपमेंट का प्रावधान किया गया है। हेल्थ केयर, AI सेंटर, आईटी, डाटा सेंटर, होटल, हॉस्पिटैलिटी, हाइपरमार्केट, मॉल, होलसेल, मल्टीप्लेक्स, कॉरपोरेट, हाई राइज ऑफिस, एजुकेशन हब अन्य संस्थान को एक स्थान पर देने की कवायद की गई है।

अनलिमिटेड दिया गया FAR

बहु मंजिला, गगनचुंबी, भूमि के आधार पर 50 मंजिल से भी ऊंची मंजिला इमारत बन सकेंगे। 

2005 के बाद नहीं लाया गया मास्टर प्लान 

मास्टर प्लान 1995 में जारी हुआ था जिसकी समय अवधि 2005 तक की थी। 2005 के बाद मास्टर प्लान नहीं लाया गया। 2021 में मास्टर प्लान 2031 की दावा आपत्तियां बुलाई गई। कई प्रावधानों में गड़बड़ियों के कारण और भारी विरोध के कारण यह लागू नहीं हो सका। 2023 में मास्टर प्लान 2031 का संशोधन ड्राफ्ट जारी किया गया लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते मास्टर प्लान लागू नहीं किया जा सका। 2024 में राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते मास्टर प्लान के अंतिम ड्राफ्ट को ही सिरे से खारिज कर दिया गया था। अब 2026 में सुप्रीम कोर्ट में सीलिंग एक्ट के मामले में पकड़ते तूल को लेकर प्रस्तावित मास्टर प्लान जारी किया गया।

सीएम डॉ. मोहन ने दी जानकारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप का प्रकाशन करने की जानकारी दी। सीएम ने सोशल मीडिया पर बताया, ‘गणेश अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर लंबे अंतराल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप का प्रकाशन किया गया है। यह योजना भोपाल की प्राकृतिक धरोहर – भोजताल, वन क्षेत्रों एवं बाघ भ्रमण क्षेत्र – के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी और आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से तैयार की गई है। योजना में हरित TDR का प्रावधान किया गया है, जिससे हरित क्षेत्र में आने वाली भूमि के स्वामियों की क्षतिपूर्ति के साथ विकासकर्ताओं को TDR के माध्यम से अतिरिक्त विकास की सुविधा मिल सकेगी। समृद्ध, सुगम और विकसित भोपाल के संकल्प की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है। प्रकाशित प्रारूप पर नागरिक अपने आपत्ति एवं सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं।’ 

हेमंत खंडेलवाल ने जताया सरकार का आभार

भाजपा मध्य प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने ड्राफ्ट जारी करने पर सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में सरकार लगातार काम कर रही है। मास्टर प्लान में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर ड्यूल परमिशन के विकल्प पर अध्ययन किया गया। उन्होंने व्यापारियों के हित में योजना लाने के लिए सरकार का आभार जताया और कहा कि भोपाल के जनप्रतिनिधियों ने भी व्यापारियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया।

मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर सियासत 

मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी होने पर प्रदेश में इसे लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि भोपाल का मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ है, बल्कि केवल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। यह ड्राफ्ट भी सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद तैयार किया गया है। शहर के नागरिकों की समस्याओं को लेकर गंभीर होती, तो जनता के आंदोलन के समय ही इस दिशा में पहल की जाती। लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ड्राफ्ट तैयार किया गया। अभी प्लान लागू होने में 4 से 6 महीने लगेंगे।

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