शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से न्याय के इतिहास में एक बहुत बड़ा और कड़ा फैसला सामने आया है। बहुचर्चित बच्चियों से दुष्कर्म और यौन शोषण मामले में पॉक्सो विशेष न्यायालय ने मुख्य आरोपी प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 77 लाख 64 हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है। देश में संभवतः यह पहला ऐसा मामला है जब किसी अपराधी को इस तरह एक साथ 10 बार उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। वहीं, इस घृणित कृत्य में प्यारे मियां का साथ देने वाली उसकी सहयोगी राबिया बी को 20 साल की कैद की सजा दी गई है।
साल 2014 से चल रहा था काले कारनामों का सिलसिला
78 वर्षीय आरोपी प्यारे मियां लंबे समय से अपने काले कारनामों को अंजाम दे रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी साल 2014 से मासूम बच्चियों का सेक्सुअल हैरेसमेंट कर रहा था। वह ज्यादातर मामलों में जन्मदिन मनाने या नौकरी व अन्य कामों का झांसा देकर बच्चियों को अपने जाल में फंसाता था और पार्टी के बहाने बुलाकर उनके साथ दुष्कर्म करता था। आरोपी ने कमरे में हिडन कैमरे लगा रखे थे, जिनसे वीडियो बनाकर वह पीड़िताओं को ब्लैकमेल भी करता था। इस दरिंदगी से तंग आकर एक पीड़िता ने आत्महत्या भी कर ली थी।
11 जुलाई 2020 को हुआ था खुलासा
यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब 11 जुलाई 2020 की रात पुलिस को भोपाल में 5 बच्चियां संदिग्ध हालत में घूमती हुई मिली थीं। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिकंजा कसा था। इससे पहले 7 मार्च 2022 को भी प्यारे मियां को एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
अदालत में सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपनी सौतेली नातिन को पहले नशीला पदार्थ देकर अपनी हवस का शिकार बनाया था और पीड़िता के गर्भवती होने पर उसका जबरन गर्भपात भी कराया था।
सहयोगी राबिया बी देती थी गलत काम में साथ
इस पूरे सिंडिकेट में आरोपी की सहयोगी राबिया बी मुख्य भूमिका निभाती थी। राबिया मासूम बच्चियों को बहला-फुसलाकर और लालच देकर प्यारे मियां तक पहुँचाने का काम करती थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पुख्ता सबूतों व गवाहों के आधार पर प्यारे मियां और उसकी सहयोगी को दोषी करार देते हुए यह ऐतिहासिक सजा सुनाई है।
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