हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सरकारी आवास के बकाया मामले में बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में हुड्डा की सरकारी कोठी पर लगाए गए 27 लाख 17 हजार रुपये के पीनल रेंट को माफ करने का फैसला लिया गया। वहीं, पूर्व हाउसिंग बोर्ड चेयरमैन राजवीर सिंह फौगाट के सरकारी आवास से जुड़े मामले में भी कार्रवाई की गई है।
कैबिनेट ने दोबारा विचार के बाद लिया फैसला
भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकारी कोठी का पीनल रेंट अगस्त 2024 से लेकर वर्ष 2025 के अंत तक की अवधि से जुड़ा है। निर्धारित समय से अधिक सरकारी आवास में रहने के कारण उन पर यह राशि लगाई गई थी। उस दौरान हुड्डा के पास नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं था।
हुड्डा ने सरकार से पीनल रेंट माफ करने का अनुरोध किया था। इसके बाद प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के सामने रखा गया। इससे पहले भी इस मामले पर मंत्रिमंडल में चर्चा हुई थी, लेकिन कुछ मंत्रियों की आपत्ति के चलते फैसला टाल दिया गया था। अब दोबारा विचार के बाद 27.17 लाख रुपये का पीनल रेंट माफ कर दिया गया।
राजवीर सिंह फौगाट के मामले में भी फैसला
कैबिनेट बैठक में पूर्व हाउसिंग बोर्ड चेयरमैन राजवीर सिंह फौगाट से जुड़े सरकारी आवास के मामले पर भी चर्चा हुई। वह पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार के दौरान जननायक जनता पार्टी (JJP) के कोटे से हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन बने थे।
पंचकूला के सेक्टर-12ए स्थित सरकारी कोठी खाली नहीं करने के मामले में उन पर करीब 38 लाख रुपये का पीनल रेंट लगाया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में करीब 4 लाख रुपये की पेनल्टी लगाए जाने का भी उल्लेख है। इस संबंध में अलग-अलग बताई गई राशियों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
क्या होता है सरकारी आवास का पीनल रेंट?
सरकारी आवास निर्धारित समय के भीतर खाली नहीं करने पर सामान्य किराए से कई गुना अधिक राशि वसूली जाती है। इसे पीनल रेंट कहा जाता है। हरियाणा में लागू नियमों के अनुसार, नई सरकार बनने के बाद मंत्री या विधायक को निर्धारित अवधि में सरकारी आवास खाली करना होता है।
नियमों के मुताबिक, समय सीमा पार होने पर पहले महीने सामान्य किराए का 50 गुना, दूसरे महीने 100 गुना और तीसरे महीने 200 गुना तक किराया वसूलने का प्रावधान है। इसके बाद भी आवास खाली नहीं होने पर चौथे महीने से सामान्य किराए का 400 गुना तक पीनल रेंट लगाया जा सकता है।
कैबिनेट के इस फैसले के बाद सरकारी आवासों से जुड़े नियमों और अलग-अलग मामलों में दी जाने वाली राहत को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है।
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