फर्जी दस्तावेजों के जरिए 6.32 करोड़ रुपये का मुआवजा लेने का आरोप, जनवरी में एसीबी ने 17 आरोपियों को किया था गिरफ्तार
धनबाद। झारखंड के बहुचर्चित धनबाद रिंग रोड भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई लगातार जारी है। करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले में अब 85 वर्षीय नरसिंह दास को गिरफ्तार किया गया है। एसीबी ने 5 नवंबर को यह कार्रवाई की। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है।
धनबाद एसीबी ने ईटीवी भारत को गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि नरसिंह दास की गिरफ्तारी भी उसी कांड में हुई है, जिसमें जनवरी 2026 में 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के दौरान फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का मुआवजा हासिल किया गया।
जनवरी में तत्कालीन अधिकारियों समेत 17 की हुई थी गिरफ्तारी
इस घोटाले में जनवरी 2026 में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की थी। उस दौरान तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, तत्कालीन अंचल अधिकारी विशाल कुमार और कानूनगो मिथिलेश कुमार समेत कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें भू-अर्जन कार्यालय के कर्मचारी, अमीन और कथित बिचौलिये भी शामिल थे।
अब 85 वर्षीय नरसिंह दास की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में है।
6.32 करोड़ रुपये का अवैध मुआवजा लेने का आरोप
एसीबी की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, नरसिंह दास पर धनबाद मौजा संख्या 51 के खाता संख्या 121 और प्लॉट संख्या 1630 से संबंधित जमीन के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 6 करोड़ 32 लाख 13 हजार 585 रुपये 99 पैसे का अवैध मुआवजा हासिल करने का आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार, 21 अक्टूबर 1970 की जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों में कथित तौर पर कूटरचना की गई थी। जिला अवर निबंधक कार्यालय से प्राप्त मूल दस्तावेजों में जमीन की रजिस्ट्री हराधन महतो एवं अन्य के नाम पर बांग्ला लिपि में दर्ज थी। आरोप है कि इसे अंग्रेजी में कूटरचित दस्तावेजों के रूप में तैयार कराया गया और इसी के आधार पर सरकारी मुआवजे की राशि हासिल की गई।
बिहार के अरवल का रहने वाला है आरोपी
एसीबी के मुताबिक, निगरानी थाना कांड संख्या 32/16 में प्राथमिक अभियुक्त बनाए गए नरसिंह दास बिहार के अरवल जिले के परशुरामपुर गांव का रहने वाला है। फिलहाल एसीबी आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया में जुटी है।
इस मामले में जनवरी में 17 गिरफ्तारियों के बाद अब 18वीं गिरफ्तारी ने रिंग रोड मुआवजा घोटाले की जांच को फिर सुर्खियों में ला दिया है। एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है।

