अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्य प्रदेश में लल्लूराम डॉट कॉम की खबर का बड़ा असर हुआ है। ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय में छात्र सुमित चौधरी की मौत के बाद मचे हड़कंप के बीच प्रशासन हरकत में आ गया है। Lalluram.com की खबर के बाद एक्शन मोड में आए जनजाति कार्य विभाग ने बालक छात्रावास के हॉस्टल अधीक्षक नील शरण सिंह को निलंबित कर दिया है। वहीं पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है। इस घटनाक्रम के साथ ही छात्रावास में छात्रों के नशे की ओर बढ़ते झुकाव ने भी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय के बालक छात्रावास के छात्र सुमित चौधरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। इस खबर को लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद जनजाति कार्य विभाग के संभागीय आयुक्त जे.पी. यादव ने यह बड़ी कार्रवाई की है। निलंबित अधीक्षक की जगह बृजेंद्रपाल मोंगर को छात्रावास का प्रभार सौंपा गया है।

ज्ञानोदय हॉस्टल में मौत का साया: 16 को दादा ले गए, 19 को छात्र ने तोड़ा दम, छुट्टी में देरी बनी मौत की वजह? परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन भी कर दिया है। समिति में जे.पी. नापित (सहायक संचालक, जनजाति कार्य विभाग शहडोल), मनोज तिवारी (प्राचार्य, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पचगांव) तथा राजेंद्र तिवारी (क्षेत्र संयोजक, जनजाति कार्य विभाग) को सदस्य बनाया गया है। समिति ने छात्रावास पहुंचकर जांच शुरू की। छात्र की तबीयत बिगड़ने से लेकर उपचार व्यवस्था और छात्रावास प्रबंधन की भूमिका तक सभी बिंदुओं पर पड़ताल में जुट गई।

यह है पूरा मामला

बता दें की अनूपपुर जिले के ग्राम पयारी निवासी छात्र सुमित चौधरी पिछले कुछ दिनों से छात्रावास में बीमार चल रहा था। इस दौरान विद्यालय प्रबंधन ने प्रारंभिक उपचार कराए जाने की बात कह, लेकिन 16 फरवरी को अचानक तबीयत अधिक बिगड़ने पर छात्र के दादा उसे अपने साथ घर ले गए। जहां इलाज के दौरान 19 फरवरी को उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने विद्यालय प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना है कि छात्र की हालत लगातार बिगड़ने के बावजूद समय रहते अवकाश नहीं दिया गया, जिससे समुचित इलाज संभव नहीं हो सका। इस पूरे घटनाक्रम के बीच छात्रावास में छात्रों द्वारा नशा किए जाने की बात भी सामने आई है।

जनजाति कार्य विभाग के संभागीय आयुक्त जे.पी. यादव ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि कुछ बच्चे नशे की ओर जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह लत केवल छात्रावास में रहकर नहीं पड़ती, बल्कि कई बार बच्चे अपने घरों से ही इस तरह की आदत लेकर आते हैं।

इधर विद्यालय में कार्यरत एक प्यून लक्ष्मी ने भी चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके अनुसार छात्रावास के कुछ छात्र पाइप के सहारे हॉस्टल से बाहर निकलकर शहडोल शहर तक पहुंच जाते हैं और कथित रूप से नशे जैसी गतिविधियों में शामिल होते हैं। इस घटना ने एक बार फिर आवासीय विद्यालयों में छात्रों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

इस पूरे मामले में जनजातीय कार्य विभाग के संभागीय आयुक्त जे.पी यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में छात्रावास के हॉस्टल अधीक्षक नील शरण सिंह को लापरवाही बरतने पर निलंबित कर दिया गया है, साथ ही तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन भी कर दिया जो मामले की जांच कर रही है।  

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