कुंदन कुमार/ पटना। बिहार विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सदन का माहौल गरमा गया। विपक्षी दलों के विधायकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा के पोर्टिको में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और वामपंथी दलों के नेताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए और आरक्षण के मुद्दे पर घेराबंदी की।

​आरक्षण का कोटा 65% करने की मांग

​प्रदर्शनकारी विधायकों की मुख्य मांग आरक्षण का दायरा बढ़ाने को लेकर थी। राजद विधायकों ने मांग की कि बिहार में आरक्षण का कोटा बढ़ाकर 65% किया जाए। विधायक सुरेंद्र राम और कुमार सर्वजीत ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में आरक्षण बढ़ाया गया था, लेकिन सरकार की मंशा साफ नहीं होने के कारण इसे कानूनी दांव-पेंच में उलझा दिया गया। सुरेंद्र राम ने स्पष्ट किया कि जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी के सिद्धांत पर ही प्रदेश चलना चाहिए।

​रामविलास पासवान की प्रतिमा पर तकरार

​आरक्षण के साथ-साथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान की प्रतिमा लगाने का मुद्दा भी सदन के बाहर गूंजा। विधायक कुमार सर्वजीत ने सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “अगर संजय झा के कहने पर अरुण जेटली की प्रतिमा लग सकती है, तो दलितों के बड़े नेता रामविलास पासवान की प्रतिमा किसी प्रमुख चौक-चौराहे पर क्यों नहीं लगाई गई?” विपक्ष ने मांग की है कि सरकार को सदन में इस पक्षपात का जवाब देना होगा।

​विपक्ष का कड़ा रुख

​विपक्षी सदस्यों ने साफ कर दिया है कि वे इन मुद्दों को सदन के भीतर भी मजबूती से उठाएंगे। उनका तर्क है कि जनता से जुड़े इन अहम सवालों को उठाने के लिए विधानसभा ही सबसे उचित मंच है और जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे अपना विरोध जारी रखेंगे।