पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के 17वें दिन सदन की कार्यवाही काफी हंगामेदार रही। इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार और घूसखोरी का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। खास बात यह रही कि विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी अपनी ही सरकार को इस मसले पर कटघरे में खड़ा किया।
आवास योजना में 25% कमीशन का आरोप
रीगा विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने आवास योजना के लाभुकों के चयन में हो रही धांधली का मामला उठाया। इसके बाद भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने मोर्चा संभालते हुए आरोप लगाया कि गरीब लाभुकों से आवास की राशि के बदले 25% तक की वसूली की जा रही है। इस खुलासे के बाद सदन में गहमागहमी बढ़ गई। मामले को शांत कराते हुए मंत्री श्रवण कुमार ने आश्वासन दिया कि विधायक संबंधित अधिकारियों को ठोस जानकारी दें, सरकार दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
शराबबंदी और मुख्यमंत्री का तंज
सदन में शराबबंदी की समीक्षा को लेकर भी चर्चा हुई। जदयू विधायक श्याम रजक ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत राय कुछ भी हो, लेकिन पूरा एनडीए गठबंधन बिहार में शराबबंदी जारी रखने के पक्ष में है। वहीं, बीते दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद विधायक भाई वीरेंद्र के बीच हुई तीखी नोकझोंक की चर्चा भी बनी रही। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि हमने हमेशा काम किया है, जबकि विपक्ष केवल शोर मचाना जानता है। हालांकि, अपनी बात रखते हुए सीएम ने अपनी सीटों की संख्या (202) को गलती से 2002 कह दिया।
चौकीदारों पर लाठीचार्ज का विरोध
विपक्ष ने चौकीदार-दफादार पर हुए लाठीचार्ज को ‘बर्बरता’ करार दिया। संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने इस पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में सबको प्रदर्शन का हक है और सरकार ने इसे रोका नहीं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी जायज मांगों पर विचार कर रही है।
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