कुंदन कुमार/पटना। महाराष्ट्र में प्रस्तावित बिहार भवन को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे द्वारा यह बयान दिए जाने के बाद कि महाराष्ट्र में बिहार भवन नहीं बनने दिया जाएगा, अब बिहार सरकार की ओर से कड़ा प्रतिवाद सामने आया है। बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना और निराधार बताया है।

अशोक चौधरी का तीखा बयान

अशोक चौधरी ने कहा कि यह पूरी तरह फालतू और घटिया सोच का परिचायक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी के बाप का राज नहीं है कि वह तय करे कि देश में क्या बनेगा और क्या नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महाराष्ट्र कोई राजतंत्र है, जहां किसी एक नेता के कहने से विकास कार्य रुक जाएंगे।

बिहार भवन का उद्देश्य

मंत्री ने बताया कि बिहार भवन भावनात्मक और मानवीय जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में बिहार के लोग इलाज, रोजगार और अन्य कार्यों से जाते हैं। ऐसे में बिहार भवन का मकसद सिर्फ यह है कि वहां जाने वाले लोगों को रहने और सहायता में कोई परेशानी न हो।

किसी की ताकत नहीं रोक सकती

अशोक चौधरी ने साफ कहा कि बिहार भवन सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार अन्य राज्यों में भी बनाए जाएंगे। इसे रोकने की किसी में ताकत नहीं है। देश संविधान और कानून से चलता है, किसी की जबरदस्ती से नहीं।