पटना। बिहार कांग्रेस में संगठनात्मक बदलावों और आगामी आंदोलनों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने बड़ी घोषणाएं की हैं। जिलाध्यक्षों की पहली सूची में जातियों के असंतुलन को स्वीकार करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी के सिद्धांत पर अडिग है।
अधूरे प्रतिनिधित्व में होगा सुधार
हाल ही में जारी जिलाध्यक्षों की सूची में सवर्णों के दबदबे पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए राजेश राम ने माना कि वर्तमान सूची में कई महत्वपूर्ण जाति और समूह छूट गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि दूसरी सूची जल्द आएगी, जिसमें इन वर्गों को प्राथमिकता देकर त्रुटियों को सुधारा जाएगा। संगठन की मजबूती के लिए अब जिलों की संख्या 40 से बढ़ाकर 53 कर दी गई है। बड़े जिलों को विभाजित करने का उद्देश्य सांगठनिक कार्यों को सुचारू बनाना है।
बिजली बिल और महंगाई पर आर-पार की जंग
बिहार सरकार द्वारा 1 अप्रैल से बिजली दरों में की जा रही बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है।
- 2 अप्रैल: पूरे राज्य में प्रखंड स्तर पर विरोध प्रदर्शन।
- 3 अप्रैल: राजधानी पटना में विशाल जन-आंदोलन।
राजेश राम ने एलपीजी (LPG) के बढ़ते दामों पर तंज कसते हुए कहा कि अब इसका मतलब लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस नहीं, बल्कि ले पाओगे? रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय जनता को मुफ्त बिजली का झांसा देकर अब घरेलू उपभोक्ताओं से 10% और व्यावसायिक से 20% अधिक वसूली की तैयारी है।
सत्ता पक्ष पर तीखा हमला
प्रदेश अध्यक्ष ने नीतीश सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने जनता को ठगने का काम किया है। उन्होंने भाजपा की नीतियों को गरीबों पर गाज करार देते हुए कहा कि जो सरकार खुद को सनातन की रक्षक बताती है, वह नालंदा जैसी घटनाओं में भक्तों की रक्षा करने में भी विफल रही है। राजेश राम ने नालंदा हादसे पर संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार की प्रशासनिक विफलता को आड़े हाथों लिया।
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