पटना। ​बिहार सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए 602 अरब 4 करोड़ 60 लाख 95 हजार रुपये का ऐतिहासिक बजट पेश किया है। सदन में गर्व के साथ यह साझा किया गया कि बिहार अपनी कुल जीडीपी का 20% हिस्सा शिक्षा पर खर्च कर रहा है, जो 14% के राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।

​इंफ्रास्ट्रक्चर और मॉडल स्कूल

​शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने के लिए हर प्रखंड में एक मॉडल स्कूल खुलेगा, जिसके लिए 800 करोड़ रुपये आवंटित हैं। इसके अलावा, एक नई ‘एजुकेशन सिटी’ का निर्माण और पुराने संस्थानों को 200 करोड़ की लागत से ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में पुनर्जीवित करने की योजना है। नए भवनों के लिए 210 करोड़ और मरम्मत हेतु 194 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

​छात्रों और शिक्षकों का कल्याण

​कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को 12.50 करोड़ किताब और डायरी सेट बांटे जाएंगे। शिक्षकों के लिए राहत की बात यह है कि स्थानीय निकाय वाले शिक्षक अब पूर्णतः ‘सरकारी’ बन चुके हैं। करीब 5.87 लाख शिक्षकों को अब हर महीने की 5 तारीख तक सीधे बैंक खाते में वेतन मिलना सुनिश्चित किया गया है।

​गुणवत्ता और ट्रेनिंग पर जोर

​सिर्फ ईंट-पत्थरों पर ही नहीं, बल्कि बौद्धिक विकास पर भी ध्यान है। आगामी वर्ष में 6 लाख शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे आधुनिक तकनीकों से लैस हो सकें। बिहार का यह मॉडल न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य को शिक्षा के मामले में देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार कर रहा है।