कुंदन कुमार, पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद सत्ताधारी गठबंधन के तय फार्मूले के तहत जनता दल यूनाइटेड (जदयू) कोटे से विधान पार्षद रामबचन राय ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर विधान परिषद के सभापति के रूप में प्रभार ग्रहण कर लिया है। यह बदलाव राज्य में एनडीए गठबंधन के भीतर सत्ता और पदों के आपसी संतुलन को साधने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
गठबंधन के तय फार्मूले के तहत हुआ फैसला
राजनीतिक गलियारों में चर्चा के मुताबिक, एनडीए गठबंधन के बीच यह आपसी सहमति बनी थी कि विधानसभा अध्यक्ष का पद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कोटे में रहेगा, जबकि विधान परिषद के सभापति का पद जदयू के खाते में जाएगा। इसी पूर्व निर्धारित समझौते और आपसी समन्वय के तहत आज यह स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई। रामबचन राय के सभापति का प्रभार संभालने से गठबंधन के दोनों प्रमुख दलों के बीच समन्वय और सीटों की तय व्यवस्था पर मुहर लग गई है।
रामबचन राय के सामने नई जिम्मेदारियां
जदयू के वरिष्ठ विधान पार्षद रामबचन राय के कंधों पर अब उच्च सदन की गरिमा को बनाए रखने और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। उनके प्रभार संभालने के मौके पर जदयू कार्यकर्ताओं और नेताओं में खुशी का माहौल है। उम्मीद जताई जा रही है कि उनके नेतृत्व में विधान परिषद में विधायी कार्य और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ेंगे।


