पटना। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के नाम पर डर और दबाव का धंधा चलाने वालों पर बिहार सरकार शिकंजा कसने जा रही है। गुंडों से वसूली कराने और कर्जदारों को प्रताड़ित करने पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार पहली बार माइक्रो फाइनेंस एक्ट लाने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित कानून के ड्राफ्ट को वित्त विभाग की मंजूरी मिल चुकी है और इसे राज्य मंत्रिपरिषद की सहमति के लिए भेज दिया गया है।
बजट सत्र में पेश होगा विधेयक
सरकार इस विधेयक को 2 फरवरी से शुरू हो रहे विधानसभा के बजट सत्र में पेश करेगी। विधेयक पारित होने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा। इसका उद्देश्य सूदखोरों और अवैध वसूली एजेंटों पर रोक लगाकर कर्जदारों को राहत देना है।
हर जिले में बनेंगी स्पेशल कोर्ट
माइक्रो फाइनेंस से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई के लिए राज्य के हर जिले में विशेष अदालतें गठित की जाएंगी। इन अदालतों के प्रधान फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट होंगे। आत्महत्या के मामलों में त्वरित सुनवाई का प्रावधान भी किया गया है।
बिना अनुमति कर्ज देने पर सख्त कार्रवाई
प्रस्तावित कानून के तहत माइक्रो फाइनेंस कंपनियों को बिहार में कर्ज देने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी। आरबीआई से लाइसेंस होने के बावजूद सांस्थिक वित्त निदेशक के पास रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। दस्तावेजों की जांच के बाद 90 दिनों में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बिहार में माइक्रो फाइनेंस का बड़ा जाल
सेल्फ रेगुलेटरी संस्था सा-धन के अनुसार, बिहार में 2 करोड़ 2 लाख से अधिक माइक्रो फाइनेंस लोन अकाउंट हैं। राज्य पर कुल 57,712 करोड़ रुपये का कर्ज है। पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं।
दबाव में गई कई जानें
मुजफ्फरपुर के सकरा में अमरनाथ राम और समस्तीपुर में गुड़िया देवी की आत्महत्या ने माइक्रो फाइनेंस वसूली की क्रूरता को उजागर किया था। नया कानून ऐसे मामलों में जान बचाने की उम्मीद जगाता है।
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