पटना। बिहार के शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों के लिए एक क्रांतिकारी योजना तैयार की है, जिसका लक्ष्य अगले 5 वर्षों में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाना है।

​AI और रोबोटिक्स से सजेगी कक्षाएं

​अब बिहार के छात्र केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे। स्कूलों में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), रोबोटिक मॉडल और वर्चुअल रियलिटी (VR) के जरिए पढ़ाई होगी। शिक्षक थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल डेमो भी देंगे, ताकि छात्रों की समझ गहरी हो सके। पाठ्यक्रम को कक्षा 1 से लेकर पीजी (PG) तक इस तरह बांटा गया है कि केवल भविष्य में काम आने वाले उपयोगी विषयों पर ही ध्यान दिया जाए।

​ग्रेडिंग सिस्टम और विशेष श्रेणियां

​परीक्षाओं में अब नंबरों की जगह ग्रेडिंग सिस्टम प्रभावी होगा। छात्रों को पांच श्रेणियों में बांटा गया है:
​A ग्रेड (81-100%): अति उत्कृष्ट।
​B ग्रेड (61-80%): उत्कृष्ट।
​C, D और E ग्रेड (0-60%): इन श्रेणियों के छात्रों के लिए स्कूलों में विशेष कक्षाएं और ‘मिशन मोड’ में पढ़ाई संचालित की जाएगी।

​भारी निवेश और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर

​शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के अनुसार, स्कूलों के आधुनिकीकरण के लिए 1485 करोड़ रुपये की भारी राशि स्वीकृत की गई है। प्रथम चरण में 789 स्कूलों को मॉडल बनाया जा रहा है।
इसके तहत:
​5277 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में ICT लैब।

​8000 स्कूलों में स्मार्ट क्लास और फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी की लैब।

​छात्रों को 1.61 लाख टैबलेट बांटे गए हैं।

​संगीत और रचनात्मक कलाओं के लिए 44.83 करोड़ का प्रावधान।

​कौशल विकास और करियर पर फोकस

​इस नए सिस्टम में कोडिंग, डेटा साइंस, सॉफ्ट स्किल्स और इंटर्नशिप को अनिवार्य किया जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि प्राइमरी स्तर से ही NEET और CAT जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की नींव रखी जाएगी। महत्वपूर्ण बिंदुओं के विशेष नोट्स तैयार किए जाएंगे ताकि छात्र अपडेट रहें और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।