पटना। बिहार की सियासत में अगले 48 घंटे बेहद निर्णायक होने वाले हैं। राज्य को जल्द ही नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है, जिसकी तैयारियों को लेकर राजधानी पटना के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री आवास (सीएम हाउस) आज से ही बैठकों और रणनीतियों का केंद्र बना रहेगा, जहां सत्ता के नए समीकरणों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में कैबिनेट के चेहरों से लेकर उपमुख्यमंत्री के पद तक, हर बड़े फैसले पर मुहर लगने वाली है।
सीएम हाउस में ललन सिंह और दिग्गज नेताओं का मंथन
नई सरकार के गठन को लेकर सबसे अहम भूमिका जेडीयू के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह निभा रहे हैं। वे कल शाम ही दिल्ली से पटना पहुंच चुके हैं और आज सीएम हाउस में होने वाली उच्च स्तरीय बैठकों का नेतृत्व करेंगे। इन बैठकों में जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, विजय चौधरी और विजेंद्र यादव जैसे दिग्गज शामिल होंगे।
बैठक का मुख्य एजेंडा मंत्रिमंडल के स्वरूप को तय करना है। इसमें पुराने अनुभवी चेहरों और नए जोश के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी। साथ ही, जेडीयू कोटे से उपमुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, इस पर भी अंतिम फैसला ललन सिंह की मौजूदगी में ही लिया जाएगा।
14 अप्रैल: नीतीश कुमार का इस्तीफा और विधायक दल की बैठक
मंगलवार, 14 अप्रैल का दिन बिहार की राजनीति के लिए ‘टर्न-अराउंड’ साबित होगा। सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मौजूदा कैबिनेट की अंतिम बैठक होगी। इस विदाई बैठक के तुरंत बाद नीतीश कुमार राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंपेंगे। इस्तीफे के साथ ही एनडीए विधायक दल की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक का उद्देश्य नए नेता का चुनाव करना है, जो बिहार की कमान संभालेगा।
शिवराज सिंह चौहान की भूमिका और शपथ ग्रहण
भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरी संक्रमण प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) नियुक्त किया है। शिवराज सिंह 14 अप्रैल को पटना में मौजूद रहेंगे और उनकी देखरेख में ही नए मुख्यमंत्री के नाम का प्रस्ताव रखा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, 15 अप्रैल को औपचारिक रूप से नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जाएगी और उसी दिन शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हो सकता है।
रायसेन में मीडिया से बात करते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि वे पार्टी द्वारा दी गई हर जिम्मेदारी को पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ निभाएंगे। 14 अप्रैल को नीतीश कुमार के इस्तीफे और 15 अप्रैल को नई सरकार के गठन के साथ ही बिहार में एक नए राजनैतिक युग की शुरुआत होने की उम्मीद है। पूरे राज्य की निगाहें अब सीएम हाउस और राजभवन पर टिकी हैं।
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