पटना। बिहार की राजनीति में दो दशकों से धुरी रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री का पद छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं। 1 मार्च को 75 वर्ष के हुए नीतीश ने अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए सक्रिय राजनीति से दिल्ली जाने का निर्णय लिया है। गुरुवार को उनके राज्यसभा नामांकन के साथ ही बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
सत्ता परिवर्तन का शेड्यूल
नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो सकते हैं, लेकिन वे 9 अप्रैल (वर्तमान सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने) तक पद पर बने रह सकते हैं। संभावना है कि 5 या 6 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।
कौन होगा बिहार का अगला ‘सम्राट’?
भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री की रेस में नित्यानंद राय, सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल और संजीव चौरसिया के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। हालांकि, भाजपा किसी नए चेहरे को उतारकर चौंका भी सकती है। वहीं, जदयू की ओर से नीतीश के बेटे निशांत कुमार या विजय चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
बेटे की एंट्री और नीतीश का एग्जिट प्लान
नीतीश कुमार के इस बड़े फैसले के पीछे पार्टी को एकजुट रखने की रणनीति है। जदयू नेताओं के दबाव में नीतीश अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाने को तैयार हुए, लेकिन शर्त यही थी कि वे स्वयं बिहार की सक्रिय राजनीति से हट जाएंगे। पिछले दो महीनों में तैयार इस ‘एग्जिट प्लान’ को होली के दिन अंतिम रूप दिया गया।
एक स्वर्णिम कार्यकाल का अंत
नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहते हुए राज्यसभा जाने वाले पहले नेता होंगे। अमित शाह ने उनके कार्यकाल को ‘स्वर्णिम’ बताया है। नीतीश ने स्पष्ट किया है कि वे नई सरकार को अपना मार्गदर्शन और सहयोग देते रहेंगे।
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