पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राज्यसभा चुनाव की पांच सीटों पर NDA ने अपना परचम लहराते हुए सभी सीटों पर जीत दर्ज की है। इस चुनाव ने विपक्षी महागठबंधन की एकजुटता की पोल खोल दी है, जहां उनके उम्मीदवार एडी सिंह को हार का सामना करना पड़ा।
टूटा महागठबंधन का भरोसा
चुनाव के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि महागठबंधन के 4 विधायक वोट देने ही नहीं पहुंचे। इनमें सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को लगा, जिसके 3 विधायक मतदान प्रक्रिया से नदारद रहे। विधायक सुरेंद्र और मनोज विश्वास जैसे नेताओं से पार्टी आलाकमान का संपर्क पूरी तरह टूट गया, जिससे विपक्ष की रणनीति धराशायी हो गई।
हमारे विधायक चोरी हो गए
बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इस स्थिति पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनके विधायकों को चोरी कर लिया गया है। राम ने बताया कि ये विधायक अचानक रडार से बाहर हो गए थे और उन्हें इस बात की आशंका पहले से थी। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी के साथ गद्दारी करने वाले इन विधायकों पर जल्द ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एनडीए की रणनीतिक जीत
जहां महागठबंधन बगावत और अंतर्कलह से जूझ रहा है, वहीं एनडीए ने अपने कुनबे को एकजुट रखकर क्लीन स्वीप किया। इस जीत ने न केवल राज्यसभा में एनडीए की ताकत बढ़ाई है, बल्कि बिहार विधानसभा के भीतर विपक्ष की कमजोरी को भी उजागर कर दिया है।
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें

