पटना। बिहार सरकार ने अपनी मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश पर गए राजस्व अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित के कार्यों में बाधा डालने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने इस सामूहिक अवकाश को पूरी तरह से अवैध घोषित करते हुए अधिकारियों को ड्यूटी पर लौटने के लिए आज शाम तक का समय दिया है।
अनुशासनहीनता पर गिरेगी गाज
विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज द्वारा जारी पत्र के आलोक में डिप्टी सीएम ने चेतावनी दी है कि जो भी पदाधिकारी निर्धारित समयसीमा यानी 25 मार्च की शाम 5:00 बजे तक अपने पद पर योगदान नहीं देंगे, उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि 9 मार्च से शुरू हुआ यह सामूहिक अवकाश न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे आम जनता के महत्वपूर्ण राजस्व कार्य भी ठप पड़ गए हैं।
जनहित और सरकारी योजनाओं का हवाला
सरकार का तर्क है कि वर्तमान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा और भूमि सुधार जनकल्याण संवाद जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इन कार्यक्रमों की सफलता और सुचारू क्रियान्वयन के लिए राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य है। ऐसे संवेदनशील समय में बिना अनुमति कार्य से अनुपस्थित रहना गंभीर लापरवाही और कर्तव्यहीनता माना जाएगा। डिप्टी सीएम ने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था और जनता की सेवा से सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।
वापसी पर सहानुभूति का विकल्प
एक तरफ जहां सरकार ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है, वहीं दूसरी तरफ नरमी का रास्ता भी खुला रखा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जो अधिकारी समयसीमा के भीतर स्वेच्छा से काम पर लौट आएंगे, उनकी अवकाश अवधि के समायोजन पर नियमों के तहत सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है। उन्होंने सभी अधिकारियों से अपील की है कि वे अपनी हठधर्मिता छोड़कर अपने दायित्वों का निर्वहन करें ताकि आम जनता को असुविधा न हो।
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