कुंदन कुमार, पटना। बिहार से तपेदिक (टीबी) जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने अपनी कमर कस ली है। इस दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए सरकार पूरे राज्य में एक व्यापक अभियान चलाने जा रही है। राजधानी पटना के प्रतिष्ठित लोक भवन में टीबी उन्मूलन को लेकर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के महामहिम राज्यपाल और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा बयान: टीबी मुक्त बिहार का संकल्प
कार्यक्रम के समापन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि टीबी उन्मूलन अभियान को अब केवल चुनिंदा जिलों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे पूरे बिहार में वृहद स्तर पर चलाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस महत्वपूर्ण और जन-कल्याणकारी अभियान में महामहिम राज्यपाल का भी पूरा मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हो रहा है। सरकार का मुख्य लक्ष्य आने वाले समय में बिहार को पूरी तरह से टीबी मुक्त बनाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए त्रि-स्तरीय रणनीति पर काम किया जाएगा, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- समय पर पहचान: मरीजों की शुरुआती अवस्था में ही टीबी की सटीक जांच और पहचान करना।
- नियमित उपचार: प्रभावित मरीजों को आधुनिक और मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना।
- व्यापक जागरूकता: गांवों से लेकर शहरों तक लोगों को इस बीमारी के लक्षणों, बचाव और इलाज के प्रति जागरूक करना।
अभियान की रूपरेखा और भावी रणनीति
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस अभियान के तहत घर-घर जाकर संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके साथ ही, टीबी मरीजों को मिलने वाली पोषण सहायता योजना को भी और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा ताकि मरीज समय पर ठीक हो सकें। सरकार का मानना है कि जन-भागीदारी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के दम पर बिहार से टीबी का पूरी तरह से सफाया किया जा सकता है।


