पटना। बिहार में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए चक्रवाती तूफान के प्रभाव से राज्य के अधिकांश जिलों में मौसम का मिजाज बदलने की पूरी संभावना है। हालांकि आज दिन के समय राज्य के सभी जिलों में मौसम सामान्य रहने और धूप खिलने के आसार हैं, लेकिन रात होते-होते कई इलाकों में बदलाव महसूस होने लगेगा। मौसम विभाग के अनुसार 27 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच बिहार में बारिश की गतिविधियों में काफी तेजी आएगी। इस दौरान राज्य के कई हिस्सों में हल्की से लेकर भारी बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात का खतरा मंडरा रहा है।
बंगाल की खाड़ी में गहरा रहा चक्रवाती तूफान का संकट
पूर्व-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन (अवदाब) अब तेजी से शक्तिशाली होता जा रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, यह सिस्टम और मजबूत होकर चक्रवाती तूफान का रूप ले चुका है और इसके और अधिक तीव्र होकर आगे बढ़ने की आशंका है। अनुमान लगाया गया है कि यह तूफान आंध्र प्रदेश के तट पर बापटला और विशाखापत्तनम के बीच एक गंभीर चक्रवात के रूप में दस्तक दे सकता है। इस दौरान तटीय क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 115 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिसका अप्रत्यक्ष प्रभाव दूरदराज के राज्यों जैसे बिहार के मौसम पर भी साफ देखने को मिलेगा।
27 अक्टूबर से 1 नवंबर तक झमाझम बारिश के आसार
चक्रवाती तूफान के प्रभाव और राज्य में सक्रिय हो रही नम पूर्वी हवाओं के कारण 27 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच बिहार के मौसम में बड़ा बदलाव आएगा। इस अवधि में राज्य के अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ खास स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश भी दर्ज की जा सकती है। इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। साथ ही कई जिलों में मेघगर्जन (गर्ज-चमक) के साथ वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) की आशंका भी बनी हुई है, जिसे लेकर मौसम विभाग ने पहले ही सतर्क रहने की सलाह दी है।
पटना और दक्षिण बिहार में संभावित प्रभाव
राजधानी पटना सहित गया, नालंदा, नवादा, शेखपुरा और जहानाबाद जैसे दक्षिण बिहार के कई जिलों में आज रात से ही मौसम का मिजाज बदलने की उम्मीद है। दिन में भले ही धूप खिली रहे, लेकिन रात से ही तेज हवाएं चलने और कुछेक जगहों पर हल्की बूंदाबांदी शुरू हो सकती है। पटना और आसपास के इलाकों में 28 अक्टूबर से बारिश की गतिविधियों में और बढ़ोतरी होने की संभावना है, जहां गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं।
भारी बारिश, तेज हवा और वज्रपात से जुड़े खतरे
इस मौसमी हलचल के दौरान सुरक्षा के लिहाज से कई सावधानियां बरतनी जरूरी हैं:
- जलजमाव और यातायात: लगातार या भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर सकता है, जिससे सड़कों पर जलजमाव और यातायात बाधित होने की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
- संरचनात्मक नुकसान: 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के कारण पेड़ों की शाखाएं टूटने, कमजोर मकानों, टिन की छतों और अस्थायी तंबुओं या संरचनाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
- वज्रपात का खतरा: आकाशीय बिजली गिरने से आम जनजीवन, मवेशियों और पशुधन को गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसे में खराब मौसम के दौरान खुले में जाने से बचना चाहिए।
- कृषि पर असर: खेतों में वर्तमान में तैयार खड़ी फसलों, कटाई के बाद खुले में रखी गई उपज तथा सुखाने के लिए फैलाई गई फसलों को भी इस बेमौसम बारिश से नुकसान की आशंका है, जिससे किसानों को एहतियात बरतने की सलाह दी जाती है।

