पटना। बिहार में प्री-मानसून की सक्रियता ने जनजीवन और खेती-किसानी को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने रविवार को प्रदेश के 12 जिलों के लिए आंधी और बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की प्रबल आशंका है।
अररिया में रिकॉर्ड बारिश
पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की गई। अररिया के रानीगंज में सबसे अधिक 50.4 मिमी वर्षा हुई। इसके अलावा खगड़िया (45 मिमी), भागलपुर (32.8 मिमी) और किशनगंज (32.6 मिमी) में भी भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके विपरीत, पटना, गया और छपरा सहित पश्चिमी व मध्य बिहार के जिलों को ग्रीन जोन में रखा गया है, जहां मौसम सामान्य रहने की उम्मीद है। वहीं, 38.4 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ कैमूर राज्य का सबसे गर्म जिला रहा।
मौसम बदलने के मुख्य कारण
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में तीन मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं, जिससे काल बैसाखी जैसी स्थिति पैदा हुई है:
- वेस्टर्न डिस्टर्बन्स: ईरान से उठा चक्रवाती परिसंचरण अब कैस्पियन सागर तक पहुंच गया है।
- लो प्रेशर बेल्ट: असम और पश्चिम बंगाल के ऊपर चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है।
- जेट स्ट्रीम: उत्तर-पूर्व भारत के ऊपर 90 नॉट्स की गति वाली सब-ट्रॉपिकल वेस्टरली जेट स्ट्रीम गुजर रही है।
- किसानों पर कुदरत की मार: 80% तक फसल बर्बाद
तेज आंधी और ओलावृष्टि ने रबी फसलों को भारी क्षति पहुंचाई है। गेहूं, सरसों और मक्का की तैयार फसलें खेतों में बिछ गई हैं। सारण, बेगूसराय और कोसी सीमांचल जैसे क्षेत्रों में 50 से 80 प्रतिशत तक फसल चौपट होने का अनुमान है। आम और लीची के मंजर भी भारी मात्रा में झड़ गए हैं। गौरतलब है कि इस सीजन में अब तक बिहार में सामान्य से 289% अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है।
सावधानी की अपील
मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान वे खुले मैदानों, पेड़ों या बिजली के खंभों से दूर रहें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।
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