Bikaner Loksabha News 2024: जयपुर. लोकसभा चुनावों के नतीजे तो चार जून को आएंगे, लेकिन उससे पहले दोनों बड़े दलों भाजपा और कांग्रेस के नेता अपनी-अपनी जीत के दावें कर रहे हैं. इस बीच बाड़मेर से निर्दलीय प्रत्याशी और शिव के निर्दलीय विधायक रवीन्द्र सिंह भाटी का नाम भी चर्चा में है.

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अगर हम सन् 1952 से 2019 तक हुए लोकसभा चुनावों का विश्लेषण करें, तो केवल बीकानेर लोकसभा क्षेत्र ही ऐसा है, जिसने पांच बार निर्दलीय प्रत्याशी को जीता कर लोकसभा में भेजा है. यह अपने आप में रिकॉर्ड है. निर्दलीय प्रत्याशी का लगातार पांच बार जीतने का यह रिकॉर्ड बीकानेर राज परिवार के पूर्व करणी सिंह के नाम दर्ज है. वे 1952 से लेकर 1971 तक लगातार चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. इसके बाद राजस्थान में कोई भी सांसद लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीत पाया.

अब तक ये चुने गए निर्दलीय सांसद

करणी सिंह 1952 से 1971 बीकानेर
हरिश्चंद्र शर्मा 1957 जयपुर
जीडी सोमानी 1957 नागौर
जसवंत राज मेहता 1952 जोधपुर
कृष्णा कुमारी 1971 जोधपुर
काशीराम गुप्ता 1962 अलवर
गिरिराज सिंह 1952 भरतपुर
जनरल अजीत सिंह 1952 पाली
भवानी सिंह 1952 जालौर
बूटा सिंह 1998 जालौर
किरोड़ी लाल मीणा 2009 दौसा

बाड़मेर से नहीं रहा लोकसभा पहुंचने का इतिहास

राजस्थान में 1952 से लेकर 2019 तक हुए लोकसभा चुनाव में केवल 11 ही निर्दलीय प्रत्याशी लोकसभा सांसद चुने गए हैं. जिन सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी लोकसभा सांसद चुने गए हैं उनमें बीकानेर, जयपुर, दौसा, नागौर, जोधपुर, अलवर, भरतपुर, पाली और जालोर सीटें हैं. बाड़मेर से निर्दलीय प्रत्याशी का लोकसभा तक पहुंचने का इतिहास नहीं रहा है. निर्दलीय प्रत्याशी को अंतिम बार जीत 2009 के लोकसभा चुनाव में मिली जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और मौजूदा कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा दौसा से निर्दलीय चुनाव जीते थे.

पहली बार पांच निर्दलीय सांसद

1952 में हुए पहले आम चुनाव में करणी सिंह बीकानेर, जसवंत राज मेहता जोधपुर, गिरिराज सिंह भरतपुर, भवानी सिंह जालोर और जनरल अजीत सिंह पाली से निर्दलीय लोकसभा सांसद चुने गए थे. पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे बूटा सिंह भी 1998 में टिकट कटने के बाद बागी होकर जालोर से निर्दलीय चुनाव लड़े और सांसद चुने गए थे.

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