रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीतिक यात्रा में कुछ ऐसे व्यक्तित्व भी उभर कर आए हैं, जिनकी पहचान उनके ओहदों के साथ उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, जनसंपर्क और शासनकाल से बनती है। डॉ. रमन सिंह वैसा ही एक नाम हैं। 15 अक्टूबर 1952 को जन्मे रमन सिंह के लिए आज का दिन केवल शुभकामनाएं देने का नहीं बल्कि उनके सार्वजनिक जीवन, उपलब्धियों, चुनौतियों और लोकतंत्र के प्रति उनके दायित्वों पर विचार करने का भी है। कवर्धा की धरती पर जन्मे डॉ. रमन सिंह की जीवन यात्रा एक चिकित्सक से आरंभ होकर जनप्रतिनिधि, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष तक जा पहुंची है।
आयुर्वेद चिकित्सा में बी.ए.एम.एस. की शिक्षा प्राप्त डॉ. रमन सिंह को चिकित्सा के क्षेत्र मे रहते हुए समाज की दुख-पीड़ा समझने, उसे कम करने और सेवा की भावना से जुड़ने का अवसर मिला। वस्तुतः उनके जीवन की शुरुआती पहचान भी इसी पृष्ठभूमि से बनी है। चिकित्सकीय सेवा के बाद आपने जनसंघ और युवा राजनीति के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। वर्ष 1983 में कवर्धा नगर पालिका के पार्षद बनने से आरंभ हुई उनकी राजनीतिक यात्रा ने आगे चलकर मध्य प्रदेश विधानसभा, लोकसभा और केंद्रीय मंत्रिमंडल तक का रास्ता तय किया।

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री के रूप में सफलता पूर्वक कार्य करने के बाद वर्ष 2003 में डॉ. रमन सिंह को छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व सौंपा गया। यही वह साल था जब वे पहली बार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने। संघर्ष, सफलता और समर्पण की उनकी यह यात्रा बताती है कि राजनीति में संगठन, निरंतरता, जनसंपर्क और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता किस प्रकार किसी व्यक्ति के सार्वजनिक जीवन को आकार देती है।
वर्ष 2003 से 2018 तक लगातार तीन कार्यकालों में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे चाउर वाले बाबा डॉ.रमन सिंह के शासनकाल की चर्चा विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और ग़रीब परिवारों को सस्ती दरों पर चावल उपलब्ध कराने वाली योजनाओं के संदर्भ में होती है। इसी जनकल्याणकारी और अनोखे पहचान के कारण उन्हें सार्वजनिक रूप से ‘चाउंर वाले बाबा’ कहा गया।

किसी भी सरकार की योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से ही किया जाना चाहिए कि उनसे आम नागरिक के जीवन में कितना बुनियादी बदलाव आया। गरीब परिवार के लिए समय पर राशन मिलना एक शासकीय सुविधा होने के अलावा कमज़ोर तबकों के लिए भोजन की चिंता कम होने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का आधार है। खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में डॉ.रमन सिंह के शासनकाल के प्रयासों ने इसी प्रश्न को राज्य की राजनीति के केंद्र में रखा।
उनके कार्यकाल में ग्रामीण विकास, सड़क और बहुत सी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, शिक्षा, महिला कल्याण और प्रशासन में तकनीक के उपयोग जैसे विषय भी काफी चर्चा में रहे। सरस्वती साइकिल योजना जैसे क़दमों का उद्देश्य छात्राओं की स्कूल तक पहुँच आसान बनाना था। यह भी सत्य है कि किसी भी शासन का आकलन उस कार्यकाल मे घोषित योजनाओं से नहीं बल्कि उनके क्रियान्वयन, लाभार्थियों के अनुभव और दीर्घकालीन परिणामों से तय होता है। लोकतंत्र में किसी भी सार्वजनिक व्यक्तित्व का मूल्यांकन एक पक्षीय नहीं हो सकता। लंबा शासनकाल निस्संदेह उपलब्धियों से भरा होता है लेकिन कठिन निर्णय, विवाद और नीतिगत सवाल भी सामने आते हैं।

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद और राज्य के आंतरिक सुरक्षा की चुनौती उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल का एक महत्वपूर्ण विषय रही। शासन की निष्पक्षता, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता किसी भी सरकार के लिए कसौटी होती हैं। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इन विषयों पर तथ्यपरक चर्चा करना ही लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। जन्मदिन जैसे विशेष अवसर पर किसी जन नायक के योगदान को याद करने का अर्थ यह नहीं कि उनके कार्यकाल से जुड़े दीगर प्रश्नों को भुला दिया जाए। यही तो सच्ची लोकतांत्रिक परिपक्वता है जहां उपलब्धियों और कमियों दोनों की चर्चा संग-संग की जा सकती है।
19 दिसंबर 2023 से डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल है। इस पद प्रकृति और विशेष संवैधानिक गरिमा मुख्यमंत्री के पद से बिल्कुल अलग है। सभी को ज्ञात है, विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित ढंग से संचालित करना, नियमों का पालन सुनिश्चित करना और सभी सदस्यों को संसदीय मर्यादा के भीतर अपनी बात रखने का अवसर देना है और डॉ.रमन सिंह इस कार्य को निपुणता के साथ कर रहे हैं। इस नए जिम्मेदारी में निष्पक्षता का विशेष महत्व है। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की बुलंद आवाज लोकतंत्र का सौन्दर्य है। डॉ. रमन सिंह के लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव का उपयोग इस संवैधानिक दायित्व को प्रभावी बनाने में बखूबी किया जा रहा है।
किसी भी व्यक्ति के लिए जन्मदिन उसके जीवन की बीती यात्रा को देखने और आने वाले समय के संकल्प तय करने का अवसर होता है। डॉ. रमन सिंह के लिए भी यह अवसर उनके सार्वजनिक जीवन की उपलब्धियों, अनुभवों और वर्तमान जिम्मेदारियों के विषय महत्वपूर्ण है। किसी जन-नायक की स्थायी पहचान महज उसके कार्यकाल की अवधि से नहीं बनती बल्कि इस बात से बनती है कि उसके निर्णयों ने लोगों के जीवन को कितना संवारा और प्रभावित किया है साथ ही उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अपने दायित्वों को किस प्रकार निभाया है।

सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि पद पर बने रहना ही नहीं होती बल्कि जनता के विश्वास, संवैधानिक मर्यादा और सेवा के मूल्यों को सम्मान देना भी होता है। डॉ. रमन सिंह के जन्मदिन पर उन्हें स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएँ देते हुए मेरे साथ लल्लूराम.कॉम परिवार आशा करता है कि उनका अनुभव छत्तीसगढ़ की लोकतांत्रिक परंपराओं, विधानसभा की गरिमा और जनहित से जुड़े विमर्श को समृद्ध करने में उपयोगी होगा।
लेखक : संदीप अखिल, सलाहकार संपादक न्यूज 24 मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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