रायपुर। भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर नियुक्तियां करते हुए छत्तीसगढ़ के दो नेताओं को दूसरे राज्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र से विधायक गोमती साय को गुजरात का सह-प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं, अकलतरा के पूर्व विधायक सौरभ सिंह को झारखंड का सह-प्रभारी बनाया गया है।

भाजपा की ओर से जारी नियुक्तियों के अनुसार, गुजरात में तरुण चुघ को प्रभारी बनाया गया है, जबकि गोमती साय और अजय महावर को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं झारखंड में गजेंद्र पटेल को प्रभारी नियुक्त किया गया है। झारखंड के सह-प्रभारियों में छत्तीसगढ़ के पूर्व विधायक सौरभ सिंह और बिहार की निवेदिता सिंह को जिम्मेदारी दी गई है।

कौन हैं गोमती साय?

गोमती साय छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रमुख महिला नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारियों के साथ स्थानीय निकाय से लेकर संसद और विधानसभा तक का राजनीतिक सफर तय किया है। वर्तमान में वे पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं।

गोमती साय का सियासी सफर

2005-2010: जशपुर जिला पंचायत सदस्य के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

2006-2008: जशपुर जिला युवा मोर्चा की महामंत्री रहीं।

2008-2010: जशपुर भाजपा मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।

2010-2015: फरसाबहार जनपद सदस्य रहीं।

2015-2019: जशपुर जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर रहीं।

2019-2023: रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहीं।

2023: पत्थलगांव विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बनीं।

अब संगठन ने उन्हें गुजरात में सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। यह नियुक्ति उन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में भूमिका निभाने का अवसर देती है।

कौन हैं सौरभ सिंह?

सौरभ सिंह जांजगीर-चांपा जिले की अकलतरा विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रह चुके हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (BSP) से की थी। वर्ष 2008 में वे पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद वर्ष 2018 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। हालांकि, 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब भाजपा ने उन्हें झारखंड का सह-प्रभारी नियुक्त किया है।

सौरभ सिंह का राजनीतिक और अकादमिक सफर

सौरभ सिंह अकादमिक क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। वे वर्ष 1998 और 1999 में दो बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा के साक्षात्कार चरण तक पहुंचे थे।

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