भूपेश बघेल लो ब्लडप्रेशर के शिकार हैं- बीजेपी

 
रायपुर- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल लो ब्लड प्रेशर के शिकार हो गए हैं. दरअसल ये हम नहीं बल्कि बीजेपी कह रही है. हुआ यूं कि मुख्यमंत्री डाॅ.रमन सिंह ने  किसानों को बोनस दिए जाने के मामले में कांग्रेस के विरोध के बीच कहा था कि बोनस तिहार से कांग्रेसियों का फ्यूज उड़ गया है. सीएम के बयान पर पलटवार करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि जब कमजोरी आती है, तो चक्कर आने लगता है और आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है. यह एक बीमारी है और जब भी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगे तो बल्ब को फ्यूज नहीं बताना चाहिए, मुख्यमंत्री ने खुद अपने कार्यकर्ताओं और मंत्रियों से कथा था कि कमीशनखोरी बंद कर दें, लेकिन वह खुद देख रहे हैं कि कमीशनखोरी की लत ऐसी लगी है कि वे ना तो बंद कर पा रहे हैं और ना ही पार्टी में कोई कमीशनखोरी छोड़ रहा है. इसलिए आंखों के सामने अंधेरा बढ़ता जा रहा है.
भूपेश बघेल के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी प्रवक्ता शिवरतन शर्मा ने कहा कि ऐसी बीमारी का दुष्प्रभाव मस्तक में दिखता है. इससे व्यक्ति को हर चीज उल्टी नजर आती है. उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल लो बीपी के शिकार हो चुके हैं. इसलिए मजबूती भी उन्हें कमजोर दिखती है. लगातार हार व जनता द्वारा ठुकराए जाने के अंदेशे से ही विचलित पीसीसी अध्यक्ष को ब्लड प्रेशर की जांच करानी चाहिए. बोनस के लिए किए गए प्रयास और इसके सुचारू वितरण से प्रदेश के किसानों के चेहरे की मुस्कान देखने की बजाए अपने ही दुख और क्लेशयुक्त छवि उनके चेहरे पर नजर आती है. शायद यही वजह है कि भूपेश मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह की सक्रियता व नेतृत्व का कसाव देख पाने में असमर्थ हैं. शिवरतन शर्मा ने कहा कि कमजोरी यदि किसी भी तरह की हो तो व्यक्ति सामने वाले में कमी निकालता हैं. चौदह वर्षों से विपक्ष में बैठे कांग्रेसियों को न तो रात्रि में बिजली की चमक दिखाई दे रही है, न ही ये  उगते सूरज से आच्छादित छत्तीसगढ़ की सुबह को महसूस कर पा रहे हैं. खाली दिमाग शैतान का कहावत को चरितार्थ करते कांग्रेसियों के जेहन में सिर्फ कमीशन व रिश्वत जैसे शब्द घूमता है आखिर 60 वर्षों का आदत को छूटने में टाईम लगता है.
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि बोनस की घोषणा से ही दांव हाथ से जाते देखकर तिलमिलाये कांग्रेसियों को विकास व इसके खुशी में शामिल होने के बजाय ईष्या, द्वेष, क्लेश  जैसी नकारात्मक राजनीति ज्यादा आसान लगता है, जबकि इसी के कारण वे विगत चौदह वर्षों से सत्ता से वंचित हैं. वर्षों तक केन्द्र में व विभिन्न राज्यों की सत्ता भोगने पश्चात कोर्ट कचहरी जेल की यात्रा कांगे्रस संगठन व इसके बड़े चेहरों का अतीत रहा है, इनके प्रधानमंत्री से लेकर सामान्य कार्यकर्ता तक कार्यकाल खत्म होने पर कोर्ट व पेशी का दौर जनता देख चुकी है.  इसलिये ये इसे परंपरा मान चुके हैं और कयास लगाते रहते हैं.  प्रदेश की सरकार डॉ. रमन के चेहरे और कार्यों के आधार पर चौथे पारी के प्रति निश्चिंत है.  कांग्रेसियों को अपनी चिंता करनी चाहिए कहीं प्रमुख विपक्ष जैसी स्थिति से भी वे वंचित ना हो जायें और प्रदेश अध्यक्ष बीपी का इलाज करवा कर नमक की मात्रा संतुलित कर लें ताकि उनको रक्तचाप के स्तर की निम्नता दूर हो व ऊजाले को उजाले की तरह महसूस कर सकें.

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