‘राहुल गांधी रोककर रखे हैं, नहीं तो भारत में भी बांग्लादेश-नेपाल जैसे हालात होंगे’ बयान पर मचा सियासी बवाल, संदीप वर्मा ने FIR दर्ज करने की उठाई मांग
रांची। झारखंड में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के विवादित बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मंत्री इरफान अंसारी को तत्काल प्रभाव से मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है। भाजपा ने उनके बयान को देश में अशांति फैलाने वाला बताते हुए अविलंब एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा ने इरफान अंसारी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मंत्री बांग्लादेश और नेपाल में हुए आंदोलनों की तुलना भारत में जेन-जी आंदोलन से कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इरफान अंसारी धमकी भरे लहजे में कह रहे हैं कि राहुल गांधी युवाओं को रोककर रखे हुए हैं, अन्यथा भारत में भी बांग्लादेश और नेपाल जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
संदीप वर्मा ने कहा कि इस बयान से एक बार फिर कांग्रेस और कांग्रेस नेताओं का चरित्र उजागर हुआ है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां पार्टी चुनाव जीतती है, वहां चुनाव आयोग सही होता है, लेकिन जहां हार का सामना करना पड़ता है, वहां चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जाते हैं और धमकियां दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को समझना चाहिए कि देश की जनता सब कुछ देख रही है।
क्या कहा था मंत्री इरफान अंसारी ने?
दरअसल, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर समय रहते सरकार नहीं संभली और लोगों की आवाज व अधिकारों को दबाया गया, तो भारत में भी बांग्लादेश और नेपाल जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने दावा किया था कि देश के 40 लाख युवा और छात्र सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी उन्हें रोककर रखे हुए हैं। उनके एक इशारे पर देश की स्थिति बदल सकती है। इसके साथ ही उन्होंने एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को घेरते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की थी।
फिलहाल, इरफान अंसारी के इस बयान ने झारखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा लगातार उनके इस्तीफे और कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

