महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को लेकर सियासत गरमाई हुई है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने SIR के विरोध को लेकर ठाकरे बंधुओं के ‘गर्जना मोर्चा’ पर जोरदार पलटवार किया है. वहीं, महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला करते हुए उनके कार्यक्रम को ‘गर्जना मार्च’ के बजाय “कोल्हे-कुई मार्च (सियारों की आवाज)” बताया.
ठाकरे बंधुओं के ‘गर्जना मोर्चा’के बीच भारतीय जनता पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने एसआईआर का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों और नेताओं पर जोरदार पलटवार किया है.
महाराष्ट्र में एसआईआर को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. रविंद्र चव्हाण ने पूछा कि क्या देश के प्रधानमंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री का फैसला घुसपैठिए करेंगे? चव्हाण ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में SIR को लेकर दिए गए बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए विरोध कर रहे नेताओं से कई सवाल पूछे हैं.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या एक मतदाता को एक से ज्यादा जगह मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए? अगर ऐसा होता है तो क्या देश का लोकतंत्र सुरक्षित रह पाएगा?
महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने ‘गर्जना मार्च’ प्रदर्शन के समय को विश्व पशु दिवस से जोड़ा. उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद विपक्ष की शिकायतें ‘अंगूर खट्टे हैं’ वाली मानसिकता को दिखाती हैं.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की लीडरशिप में ‘गर्जना मोर्चा’ 4 अक्टूबर को निकाला गया. मार्च खत्म होने पर हेडक्वार्टर के सामने एक पब्लिक मीटिंग हुई. महा विकास अघाड़ी के अंदर अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने इस इवेंट में हिस्सा लिया. वहीं अब इस पर बीजेपी ने पलटवार किया है.
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