शिखिल ब्यौहार, भोपाल। लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी एक बार फिर विधानसभा के फार्मूला पर अमल करेगी। दरअसल, प्रदेश की 21.10 फीसदी अनुसूचित जनजाति आबादी को लेकर बीजेपी ने स्पेशल प्लान तैयार किया है। इस प्लान के तहत एमपी में चार सौ से ज्यादा सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इन सम्मेलनों में आदिवासियों और वनों में रहने वाली जातियों पर फोकस होगा। साथ ही सम्मेलनों में बीजेपी के राष्ट्रीय नेता शामिल होंगे।

इस प्लानिंग के पहला चरण आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र झाबुआ से होने जा रहा है। आगामी 11 फरवरी को पीएम मोदी झाबुआ चुनावी दौरे पर आएंगे। इसके अलावा सागर, जबलपुर, मंडला, अलीराजपुर समेत अन्य क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सम्मेलनों की रूपरेखा तैयार की गई है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के मतदाताओं में पकड़ बनाने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का खाका भी लोगों के सामने मंच से रखा जाएगा। सम्मेलनों के साथ बीजेपी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा पदाधिकारी भी हर घर दस्तक भी देंगे।

बीजेपी को ईवीएम पर भरोसा, यह सिर्फ प्रोपेगेंडा- कांग्रेस

156.16 लाख आबादी को लेकर बीजेपी के प्लान पर कांग्रेस ने निशाना साधा। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने कहा कि बीजेपी आत्मनिर्भर के दावे के साथ भारत संकल्प यात्रा निकाल रही है। बीजेपी पिछड़ों को विकास की मुख्यधारा में जोड़ने का दावा भी करती है। फिर इन सम्मेलनों का क्या औचित्य। मिश्रा ने कहा कि यह सम्मेलन सिर्फ एक प्रोपेगेंडा हैं। क्योंकि बीजेपी को अपने ईवीएम मैनेजमेंट पर पूरा भरोसा है।

पिछड़ों की बात पर कांग्रेस को होता है दर्द- बीजेपी

कांग्रेस के आरोप पर बीजेपी ने पलटवार किया। प्रदेश प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी ने कहा कि बीजेपी ने पिछड़ों को मुख्यधारा में जोड़ने का काम किया है। कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। कांग्रेस और बीजेपी शासनकाल की तुलना कर ही विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने कांग्रेस को घर भेज दिया है। बीजेपी सकारात्मक राजनीति में विश्वास रखती है। पिछड़ों के हक की बात सुन कांग्रेस को हमेशा से दर्द होता है।

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