अमृतसर. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सबसे पहले संगठन को मजबूत किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत बूथ अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और जिला अध्यक्षों के चुनाव कराए जाएंगे।
इस पूरी प्रक्रिया को 27 फरवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पंजाब भाजपा के प्रदेश चुनाव अधिकारी और पूर्व उपाध्यक्ष दिनेश सिंह बब्बू ने कहा कि हर स्तर पर जोश के साथ काम हो रहा है और इसे निर्धारित समय में पूरा कर लिया जाएगा।
14 फरवरी से शुरू होंगे चुनाव
भाजपा 14 से 18 फरवरी तक 24,400 बूथ समितियों के अध्यक्षों का चुनाव करेगी। इसके बाद 19 से 21 फरवरी तक 544 मंडल अध्यक्षों का चुनाव होगा। अंत में, 25 से 27 फरवरी तक सभी 35 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों का चयन किया जाएगा।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि संगठनात्मक चुनाव पार्टी संविधान के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार हों, भाजपा 5 से 7 फरवरी तक प्रत्येक जिले में जिला कार्यशालाओं का आयोजन करेगी। इन कार्यशालाओं में जिला चुनाव अधिकारी, सह-चुनाव अधिकारी और मंडलों के चुनाव अधिकारी भाग लेंगे।
पंजाब में भाजपा के लिए चार चुनौतियां
किसान असंतोष : अब तक भाजपा पंजाब के किसानों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाई है। कृषि कानून वापस लेने के बावजूद किसानों और भाजपा के बीच की दूरी कम नहीं हुई है। किसान आंदोलन लंबे समय से जारी है, जिससे पार्टी को नुकसान हो रहा है।
अकाली दल से गठबंधन टूटना : 2020 में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन समाप्त हो गया था। इसके चलते पारंपरिक सिख वोट बैंक भाजपा से दूर हो गया है।
सिख समुदाय की राजनीति में प्रभावी भूमिका : पंजाब की राजनीति में सिख समुदाय की अहम भूमिका है, जबकि भाजपा की छवि एक हिंदू बहुल पार्टी की बनी हुई है। इस कारण से सिख समुदाय भाजपा में जुड़ने से हिचकिचाता है, जिसका फायदा अन्य राजनीतिक दलों को मिल रहा है।
आप और कांग्रेस का उभरना : अकाली दल और भाजपा के सत्ता से बाहर होने के बाद आम आदमी पार्टी ने इस राजनीतिक खालीपन को भर दिया है। कांग्रेस भी अब मजबूत स्थिति में है। ऐसे में भाजपा के लिए संगठन को मजबूत करना ही सबसे बड़ी रणनीति हो सकती है।

पिछले एक साल से लगातार मिल रही निराशा
पंजाब में संगठन को मजबूत करना और जनता से जुड़ना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती है। पार्टी 2017 से सत्ता से बाहर है और अब अकाली दल के साथ गठबंधन भी समाप्त हो गया है। इस स्थिति से दोनों दलों को नुकसान हो रहा है। हालांकि, दोनों ही दल गठबंधन की संभावनाएं तलाश रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।
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