प्रदीप मालवीय, उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन के सेवा धाम आश्रम में पिछले 1 साल के भीतर 17 बच्चों की मौत के मामले में हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पीआईएल दर्ज करने व 2 सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए है । खास बात तो यह है कि बच्चों की मौत के मामले में महिला बाल विकास के उज्जैन जिला कार्यक्रम अधिकारी को ना तो बच्चों की मौत के आंकड़े के बारे में पता है, ना ही कैसे मौत हुई यह जानकारी है । मामले में त्रुटि मिलने पर कार्रवाई की बजाय सुधार की बात की जा रही है ।
दरअसल पूरा मामला इस प्रकार है कि उज्जैन के अंबोदिया गांव में सेवाधाम आश्रम संचालित होता है । यहां निराश्रित, बुजुर्ग, मानसिक व शारीरिक दिव्यांगजनों को रखा जाता है । वर्तमान में यहां ऐसे 1200 लोग है जिनमें महिला, बच्चे और बुजुर्ग शामिल है । इस आश्रम पर मौत के मामले व अन्य गड़बड़ियों को लेकर समय-समय पर सवाल खड़े होते आए हैं । ऐसा ही मामला अब फिर सामने आया है।
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दरअसल करीब एक साल पहले 10 बच्चों की मौत के बाद इंदौर के युगपुरुष आश्रम को बंद कर दिया गया था । बेहतर देखभाल का हवाला देकर यहां के 86 बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट कर दिया गया था । चौंकाने वाली बात ये है कि इन 86 बच्चों में से 17 बच्चों की जान जा चुकी है । यही नहीं, सबकी मौत का कारण भी एक ही बताया गया- ‘सांस लेने में तकलीफ ।’
यह खुलासा उज्जैन जिला अस्पताल और विद्युत शवदाह गृह के रिकॉर्ड की पड़ताल से हुआ है । गौरतलब है कि 25 दिसंबर 2024 को राज्य सरकार के निर्देश पर इंदौर के “युगपुरुष आश्रम” को बंद किया गया था । इसकी वजह थी कि जून-जुलाई 2024 में आश्रम में हैजे से 10 बच्चों की मौत हो गई थी । युगपुरुष आश्रम बंद होने के बाद वहां रह रहे 86 विशेष बच्चों (34 लड़के और 52 लड़कियां) को उज्जैन भेजा गया । इनकी उम्र 5 से 23 वर्ष के बीच थी ।
शिफ्टिंग के एक माह में ही यानी 23 जनवरी 2025 से मौतों का सिलसिला शुरू हो गया । उज्जैन जिला अस्पताल व शवदाह गृह के रिकॉर्ड से यह खुलासा हुआ । इससे सेवा-आश्रमों में बच्चों की स्थिति, इलाज और मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे है । उज्जैन के इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के रिकॉर्ड में दर्ज नामों से पुष्टि होती है कि 17 की मृत्यु हो चुकी है । वहीं मीडिया में खबर आने के बाद यह मामला हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने संज्ञान में लिया । हाईकोर्ट ने इंदौर के युगपुरुष धाम से उज्जैन स्थित सेवाधाम आश्रम भेजे गए बच्चों की मौतों के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (PIL) दर्ज करने के निर्देश दिए है।
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हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव व आयुक्त, कलेक्टर उज्जैन, पुलिस अधीक्षक उज्जैन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी एवं सेवाधाम आश्रम के अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है । उज्जैन सेवाधाम आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट आने के बाद अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी ।
वहीं इस घटना को लेकर जब महिला बाल विकास विभाग के उज्जैन जिला कार्यक्रम अधिकारी बृजेश त्रिपाठी से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि मामले में मध्य प्रदेश शासन महिला बाल विकास विभाग द्वारा घटना को संज्ञान में लिया गया है । इसके बाद अंतर विभागीय समिति जांच कर रही है । जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे उनमें सुधार आत्मक कदम उठाए जाएंगे । खास बात तो यह है कि अधिकारी को यह तक नहीं पता की कितनी मौत हुई है, किस कारण से हुई है । वह बार-बार जांच का हवाला देकर सवालों को टालते रहे । त्रुटि पाए जाने पर कार्रवाई की बजाय सुधार करने की बात पर जोर देते रहें ।
इस मामले को लेकर आश्रम के संचालक सुधीर भाई गोयल ने अपने वाट्सएप स्टेटस पर लिखा कि “युगपुरुष धाम इंदौर से सेवाधाम में 14 माह पूर्व एक साथ 86 दिव्यांग, बहुदिव्यांग पर सेवा पर निर्भर संक्रमित बच्चे अत्यंत नाजुक जिनमें कई मरणासन्न स्थिति में थे प्रशासन द्वारा सेवाधाम भेजे गए यदि आश्रम स्वीकार नहीं करता तो आधे से ज्यादा बच्चों की मौत संभव थी ।”
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