सत्या राजपूत, रायपुर. आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार की आगामी जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम न रखने पर तीखा विरोध जताया है. पार्टी ने इसे देश की आधी आबादी की अनदेखी और दोहरा मापदंड बताया है.

आम आदमी पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 16 से 30 अप्रैल तक होने वाली डिजिटल जनगणना और 1 मई से 30 मई तक के भौतिक सत्यापन में कुल 33 बिंदुओं के फॉर्म में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए तो अलग कॉलम दिए गए हैं, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए कोई अलग कॉलम नहीं रखा गया है.
उन्होंने कहा कि मंडल आयोग (1980) के अनुसार देश में OBC की आबादी 52% है, जबकि ICE 360 सर्वे (2021) के अनुसार भारत की लगभग 141 करोड़ आबादी में 44-48% यानी 62 से 68 करोड़ लोग ओबीसी समुदाय से हैं. देश की आधी आबादी को इस तरह अनदेखा करना सरकार का तानाशाही रवैया है.
जायसवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र की सरकार और छत्तीसगढ़ की साय सरकार पिछड़ों के विकास की बात तो करती है, लेकिन जनगणना में उनके सही आंकड़े दर्ज करने से बच रही है. उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार पिछड़ों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है?
दोहरा मापदंड का आरोप
प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र चंद्राकर वन ने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार जातिगत जनगणना की घोषणा करती है, दूसरी तरफ राजपत्र में OBC का अलग कॉलम नहीं रखा जा रहा है. बिना अलग कॉलम के OBC की सही संख्या कैसे सामने आएगी? यह समाज के साथ अन्याय और साजिश है. उन्होंने आगे कहा कि भारत एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है, लेकिन भाजपा सरकार इसे मिटाने पर तुली हुई है.
आंदोलन की दी चेतावनी
अगर केंद्र सरकार ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम नहीं देती है, तो आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ में बड़ा आंदोलन करेंगे. उन्होंने घोषणा की कि 13 अप्रैल को पार्टी प्रदेश के हर जिले में कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेगी.
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