विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के नए समता नियमों को लेकर देशभर में जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज के विरोध और सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद केंद्र ने गुरुवार को अदालत को बताया कि वह इन नियमों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करेगी। सरकार के इस फैसले को राजनीतिक दबाव के बीच बदले रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
UGC के नए नियमों पर क्यों मचा बवाल?
UGC के नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना और छात्रों को सुरक्षा प्रदान करना है। जहां 2012 के नियमों में मुख्य रूप से SC और ST वर्ग के लिए प्रावधान थे, वहीं 2026 के नए नियमों में OBC वर्ग को भी शामिल किया गया है।
हालांकि, सवर्ण समाज के एक वर्ग ने इन नियमों में झूठी शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने और शिकायतकर्ताओं की जवाबदेही तय करने के पर्याप्त प्रावधान नहीं होने पर सवाल उठाए हैं। यही विवाद अब केंद्र सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन गया है।
उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले BJP की बढ़ी मुश्किलें
UGC विवाद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने जातीय समीकरण साधने की चुनौती खड़ी कर दी है। उत्तर प्रदेश में करीब 22 फीसदी सवर्ण, 43 फीसदी OBC और 21 फीसदी SC मतदाता हैं। ऐसे में भाजपा के लिए किसी एक वर्ग की नाराजगी को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।
एक तरफ सवर्ण समाज की नाराजगी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है, तो दूसरी तरफ OBC और दलित वर्ग के बीच यह संदेश जाना भी भाजपा के लिए नुकसानदेह हो सकता है कि सरकार उनके अधिकारों को कमजोर कर रही है।
UGC नियमों पर RSS की प्रतिक्रिया, विपक्ष ने घेरा
इस विवाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी प्रतिक्रिया दी है। संघ के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के मुताबिक, जमीनी फीडबैक के आधार पर सरकार को बताया गया था कि UGC का सर्कुलर असंतुलित है। उन्होंने कहा कि अब सरकार समीक्षा समिति गठित करने जा रही है।
वहीं, विपक्ष ने केंद्र के फैसले को चुनावी मजबूरी बताया है। शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दबाव में सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं।
अब समीक्षा समिति पर टिकी निगाहें
UGC के 2026 समता नियमों पर केंद्र के ताजा रुख ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। अब सबकी निगाहें समीक्षा समिति की सिफारिशों और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।
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