प्रतीक चौहान. रायपुर. पूरा देश 75 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. इसे देखते हुए पूरे देश में अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है. लेकिन देश को आजाद हुए 75 वर्ष होने वाले है. लेकिन आज भी SECR आरपीएफ के आईजी, DIG और Bilaspur रेल मंडल के अन्य आरपीएफ उच्च अधिकारियों को ध्वजारोहण और झंडा फहराने का फर्क नहीं पता है. यही कारण है कि आईजी के डिजिटल हस्ताक्षर से स्वतंत्रता दिवस पर जो कार्यक्रम का शेड्यूल जारी किया गया है उसमें झंडा फहराने की बात कही गई है, जबकि गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण किया जाता है.

आप समझे ये दोनो का कर्क

पहला अंतर

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींच कर ऊपर ले जाया जाता है, फिर खोल कर फहराया जाता है, जिसे ध्वजारोहण कहा जाता है. क्योंकि यह 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक घटना को सम्मान देने हेतु किया जाता है जब प्रधानमंत्री ने ऐसा किया था. संविधान में इसे अंग्रेजी में Flag Hoisting (ध्वजारोहण) कहा जाता है.

जबकि 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा ऊपर ही बंधा रहता है, जिसे खोल कर फहराया जाता है, संविधान में इसे Flag Unfurling (झंडा फहराना) कहा जाता है.

दूसरा अंतर

15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री जो कि केंद्र सरकार के प्रमुख होते हैं वो ध्वजारोहण करते हैं, क्योंकि स्वतंत्रता के दिन भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो कि राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते है, उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था. इस दिन शाम को राष्ट्रपति अपना सन्देश राष्ट्र के नाम देते हैं.

जबकि

26 जनवरी जो कि देश में संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस दिन संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं

तीसरा अंतर

स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले से ध्वजारोहण किया जाता है। जबकि गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर झंडा फहराया जाता है. लेकिन आरपीएफ के अधिकारियों को शायद इस बात की जानकारी नहीं है, या कॉपी-पेस्ट के चलते उन्होंने ऐसा आदेश जारी कर दिया. यही कारण है कि आरपीएफ की जमकर फजीहत हो रही है.

 वहीं ये गलती यदि आईजी से न हुई होती तो न जाने कितने अधिकारियों को चार्जशीट जारी कर दिया गया होता, लेकिन अब ये गलती उनके डिजिटल हस्ताक्षर से ही हुई है तो अब भला उन्हें कौन चार्जशीट दे. इस संबंध में आरपीएफ का पक्ष लेने आईजी को फोन किया गया. लेकिन उनका फोन व्यस्त मिला.