पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। गरियाबंद जिले में स्वीकृत सैनिक स्कूल के लिए स्थल आबंटन की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है. राजिम क्षेत्र में कथित तौर पर गुपचुप तरीके से स्थल चयन की तैयारी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी फूट पड़ी है. वरिष्ठ भाजपा नेता एवं सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक मुरलीधर सिन्हा ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) पर पक्षपात और जनप्रतिनिधियों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराया है.

मुरलीधर सिन्हा का आरोप है कि सैनिक स्कूल के लिए जिले के सभी पांचों अनुविभागों में उपयुक्त भूमि की जानकारी मंगाई जानी थी, लेकिन इसके बजाय जिला शिक्षा अधिकारी ने केवल राजिम अनुविभाग के एसडीएम को पत्र लिखकर राजिम के आसपास 70 एकड़ भूमि की मांग कर दी. उन्होंने इसे प्रभावशाली नेताओं के इशारे पर लिया गया फैसला बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता के खिलाफ है और किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करती है.

सिन्हा ने जारी बयान में कहा कि गरियाबंद जिले को सैनिक स्कूल की स्वीकृति 13 साल के लंबे संघर्ष के बाद मिली है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में केंद्र सरकार द्वारा 100 नए सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा के बाद उन्होंने तत्कालीन विधायक डमरूधर पुजारी के साथ मिलकर दिल्ली में लगातार प्रयास किए. इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह, सांसद चंदूलाल साहू, पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई स्तरों पर पत्राचार और संपर्क के बाद गरियाबंद को यह सौगात मिली. ऐसे में अब स्थल चयन को लेकर किसी भी तरह का विवाद खड़ा होना दुर्भाग्यपूर्ण है.
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय में स्थल उपलब्ध नहीं होने जैसी अधूरी जानकारी देकर किसी एक विशेष क्षेत्र में स्कूल खोलने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जैसे कृषि महाविद्यालय भवन के स्थल को लेकर अफसरों ने विवाद खड़ा किया, वैसा ही साया सैनिक स्कूल पर नहीं पड़ना चाहिए.
मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह धीर ने सफाई देते हुए कहा कि अब जिले के सभी पांचों अनुविभागों के एसडीएम को 70 एकड़ भूमि उपलब्धता की जानकारी के लिए पत्र जारी किया जा रहा है. प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर ही उपयुक्त स्थल का चयन कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले केवल राजिम एसडीएम को पत्र लिखे जाने का मामला सामने आने के बाद विभाग ने यह कदम उठाया है.
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