रायपुर। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) ने स्वास्थ्य विभाग के उप संचालक डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई के विरुद्ध 21 अक्टूबर को जारी निलंबन आदेश पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। फेडरेशन ने इस मामले में छत्तीसगढ़ इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (CIDA) के रुख का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा है कि चिकित्सकीय संवर्ग के अधिकारों की रक्षा, निर्धारित सेवा नियमों का पालन और प्रशासनिक पदों पर संवर्गीय पात्रता सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है।
डॉ. गहवई ने स्वास्थ्य सेवा संचालनालय (DHS) में एडिशनल डायरेक्टर जैसे चिकित्सकीय संवर्ग के प्रशासनिक पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। ऐसे में उनके विरुद्ध की गई निलंबन की कार्रवाई ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिनका निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाना आवश्यक है।
चिकित्सकीय पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की नियुक्ति पर सवाल
CGDF ने कहा कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा जैसे विशिष्ट तकनीकी क्षेत्रों में प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी निभाने के लिए चिकित्सकीय ज्ञान, अनुभव और संबंधित संवर्ग की पात्रता महत्वपूर्ण है। चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना से न केवल चिकित्सकों के संवर्गीय अधिकारों, वरिष्ठता और पदोन्नति के अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, बल्कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं तथा चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित होने की आशंका है।
फेडरेशन ने यह भी रेखांकित किया कि यह समस्या केवल स्वास्थ्य सेवा संचालनालय (DHS) तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) में भी चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर गंभीर प्रश्न मौजूद हैं।
CGDF की स्पष्ट मांग है कि इन सभी पदस्थापनाओं की लागू सेवा नियमों, संवर्गीय पात्रता और वरिष्ठता के आधार पर वैधानिक समीक्षा की जाए तथा प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति के संबंध में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
हाईकोर्ट में अधिकारों की लड़ाई और निलंबन की कार्रवाई पर गंभीर प्रश्न
फेडरेशन ने कहा कि जब चिकित्सकीय संवर्ग के प्रशासनिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तब उसी प्रकरण के याचिकाकर्ता चिकित्सक के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई अनेक गंभीर प्रश्न उत्पन्न करती है।
CGDF के अनुसार, अपने वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय की शरण लेना प्रत्येक चिकित्सक का अधिकार है। न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी कार्रवाई की निष्पक्षता और परिस्थितियों की समीक्षा आवश्यक है, ताकि न्यायिक अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर चिकित्सकों के बीच भय या दबाव का वातावरण न बने।
फेडरेशन ने कहा कि डॉ. गहवई के निलंबन की परिस्थितियों और आधारों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में कार्रवाई प्रतिशोधात्मक अथवा दुर्भावनापूर्ण पाई जाती है, तो उसे निरस्त किया जाना चाहिए।
निलंबन आदेश के आधारों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग
निलंबन आदेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 एवं 22(क) के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। CGDF ने इस कार्रवाई के वास्तविक आधार, औचित्य और परिस्थितियों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी चिकित्सक के विरुद्ध विधिसम्मत, उचित और निष्पक्ष विभागीय कार्रवाई का विरोध नहीं करता। हालांकि, किसी कार्रवाई की निष्पक्षता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। यदि किसी चिकित्सक के विरुद्ध पद का दुरुपयोग, दुर्भावना अथवा प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई की जाती है, तो ऐसी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं हो सकती।
CGDF ने कहा कि चिकित्सकों के संवर्गीय अधिकारों और सेवा संबंधी मुद्दों को नियमों तथा स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप सुलझाया जाना चाहिए, न कि ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न की जानी चाहिए जिनसे चिकित्सकों को अपने वैधानिक अधिकारों के उपयोग के लिए हतोत्साहित होने का अनुभव हो।
CGDF की प्रमुख मांगें
छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने शासन एवं संबंधित विभागों के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं
- डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई के निलंबन की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। निलंबन के आधारों एवं परिस्थितियों की पारदर्शी समीक्षा हो तथा यदि कार्रवाई प्रतिशोधात्मक पाई जाती है, तो निलंबन तत्काल निरस्त किया जाए।
- न्यायालय जाने वाले चिकित्सकों पर दबाव या प्रताड़ना की कार्रवाई न हो। प्रत्येक चिकित्सक को अपने संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय की शरण लेने की स्वतंत्रता और अधिकार का सम्मान किया जाए।
- चिकित्सकीय संवर्ग के प्रशासनिक पदों पर सेवा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। नियुक्तियों में निर्धारित भर्ती नियमों, संवर्गीय पात्रता, वरिष्ठता और सेवा शर्तों का पालन किया जाए।
- DHS एवं DME में विवादित पदस्थापनाओं की वैधानिक समीक्षा की जाए
चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की नियुक्तियों एवं पदस्थापनाओं की लागू नियमों के अनुरूप समीक्षा सुनिश्चित की जाए।
चिकित्सकीय संवर्ग के अधिकारों से कोई समझौता नहीं
छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन प्रदेश के नियमित, संविदा, बॉन्डेड, स्नातकोत्तर, इंटर्न एवं विदेशी चिकित्सा स्नातक (FMG) सहित विभिन्न संवर्गों के चिकित्सकों का प्रतिनिधित्व करता है। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि चिकित्सकों के सम्मान, संवर्गीय अधिकारों, वरिष्ठता, पात्रता और सेवा नियमों की रक्षा के लिए वह प्रतिबद्ध है।
CGDF ने कहा कि चिकित्सकीय संवर्ग के अधिकारों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर वह चिकित्सक संगठनों के साथ मजबूती से खड़ा है। यदि चिकित्सकों के वैधानिक अधिकारों के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की जाती है, तो फेडरेशन उसका न्यायिक, प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक स्तर पर विरोध करेगा।
CGDF की स्पष्ट मांग है कि डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई के निलंबन की निष्पक्ष समीक्षा की जाए, चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित प्रशासनिक पदों पर सेवा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा चिकित्सकों के वैधानिक अधिकारों और सम्मान की रक्षा की जाए। चिकित्सकीय संवर्ग के अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा।



Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

