पवन राय, मंडला। मध्य प्रदेधश के मंडला की पावन धरती पर आस्था का एक ऐसा धाम, जहां हर कदम पर श्रद्धा झुकती है और हर दिल में विश्वास जगता है। हम बात कर रहे हैं मंडला-निवास मार्ग पर बसे ग्राम बकौरी के प्रसिद्ध नक्खी माता मंदिर की। जहां मान्यता है कि मां अपने दरबार में आने वाले हर भक्त की हर मुराद पूरी करती हैं। सालभर यहां भक्ति का माहौल रहता है लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां आस्था अपने चरम पर पहुंच जाती है।

मंडला जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर… जंगल में बसे ग्राम बकौरी के पहाड़ी में मां नक्खी माता का पावन दरबार स्थित है। प्राकृतिक सुंदरता के बीच बना ये मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और सुकून का केंद्र है। यह मंदिर न सिर्फ मंडला बल्कि दूर-दराज के राज्यों तक अपनी ख्याति के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि मां नक्खी माता अपने दरबार में आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी करती हैं। यही वजह है कि यहां सालभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। कोई संतान सुख की कामना लेकर आता है तो कोई सुख-समृद्धि और खुशहाली की।

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चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां का नजारा देखते ही बनता है। गांव के लोग एकजुट होकर जवारे बोते हैं। कलश स्थापना करते हैं और माता का भव्य श्रृंगार किया जाता है। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। मंदिर की एक खास बात ये भी है कि पहाड़ी पर स्थित होने के बावजूद श्रद्धालु सीधे अपने वाहनों से मंदिर तक पहुंच सकते हैं। जिससे बुजुर्ग और दूर-दराज से आने वाले भक्तों को काफी सुविधा मिलती है।

ग्रामीणों की आस्था

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब से मां नक्खी माता गांव में विराजमान हुई हैं, तब से गांव पर कभी कोई बड़ा संकट नहीं आया। मां की पाषाण प्रतिमा के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और मन को अद्भुत शांति का अनुभव होता है

इतिहास और जीर्णोद्धार

सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1997 में किया गया। जिसके बाद मंदिर को भव्य रूप दिया गया। गुंबद को चौपहला आकार दिया गया और परिसर का भी विस्तार किया गया।

जनश्रुति सबसे खास हिस्सा

इस मंदिर से जुड़ी एक अनोखी जनश्रुति भी लोगों की आस्था को और मजबूत करती है। कहा जाता है कि सैकड़ों वर्ष पहले जब लुटेरे इस गांव को लूटने पहुंचे तब देवी ने एक छोटी कन्या का रूप धारण कर गांव वालों को खतरे की सूचना दी। कन्या की तेज आवाज से क्रोधित लुटेरे उसे मारने दौड़े तभी कन्या का शरीर पत्थर का हो गया। लुटेरों ने क्रोध में आकर उस पत्थर स्वरूप की नाक काट दी। तभी से देवी को ‘नक्खी माई’ के नाम से जाना जाता है और यह मूर्ति स्वयं प्रकट मानी जाती है यानी यह मानव निर्मित नहीं है।

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आज नक्खी माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का एक जीवंत प्रतीक बन चुका है। जहां हर आने वाला भक्त अपने साथ एक उम्मीद लेकर आता है और लौटता मां के आशीर्वाद के साथ है। आस्था विश्वास और भक्ति का अद्भुत संगम यही है मां नक्खी माता का दरबार तो अगर आप भी आस्था और शांति की तलाश में हैं तो एक बार इस पावन धाम के दर्शन जरूर कीजिए।

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