Dharm Desk : धनतेरस का पर्व इस बार 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। दीपावली से पहले आने वाला यह पर्व धन-संपत्ति के साथ अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना से भी जुड़ा है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा और उनके मंत्रों का जाप विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि धनतेरस पर विधि-विधान से भगवान धन्वंतरि की आराधना करने और मंत्र जाप करने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है।

परिवार के सदस्यों को निरोगी जीवन प्राप्त हो, शरीर स्वस्थ रहे और बीमारियों से रक्षा हो, इसी कामना के साथ उनकी पूजा की जाती है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य कहा जाता है। समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर उनके प्रकट होने की कथा भी इसी दिन के महत्व को बताती है।

त्रयोदशी तिथि कब शुरू होगी
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। इस बार त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 9 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल को देखते हुए धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा।

समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य हुआ था
देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए क्षीरसागर का मंथन किया था। इसके लिए मंदराचल पर्वत को मथनी और नागराज वासुकि को रस्सी बनाया गया। मंथन के दौरान सबसे पहले हलाहल विष निकला, जिसे भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया। इसके बाद समुद्र से कई दिव्य रत्न प्रकट हुए। अंत में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उनके हाथों में अमृत से भरा कलश देखकर देवताओं और असुरों के बीच उसे पाने की होड़ लग गई। बाद में भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाया। इस कथा का उल्लेख श्रीमद्भागवत महापुराण के आठवें स्कंध में मिलता है।

धन्वंतरि मंत्र जाप से जुड़ी है आरोग्य की कामना
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ उनके मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु निरोगी शरीर, बेहतर स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है।

धन्वंतरि मंत्र:

ओम नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरये।
अमृतकलश हस्ताय सर्वभयविनाशाय सर्वरोगनिवारणाय।
त्रिलोकनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः॥

इस मंत्र के जाप से भगवान धन्वंतरि का आर्शीवाद प्राप्त करने और रोगों से रक्षा की कामना की जाती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार मंत्र का जाप करते है।

धनतेरस पर ऐसे करें भगवान धन्वंतरि की पूजा
धनतेरस के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। उन्हें फूल, अक्षत, धूप, दीप और फल अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक धन्वंतरि मंत्र का जाप करे। भगवान से परिवार के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की प्रार्थना करें। शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं और यम दीपदान करें। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है।