दिल्ली के चावड़ी बाजार (Chawri Bazar) में पुरानी इमारत के पुनर्निर्माण के दौरान हुए हादसे को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। गुरुवार को निर्माणाधीन इमारत ढहने से दो मजदूरों की मौत हो गई थी। अब इस मामले में दर्ज एफआईआर (FIR) से पता चला है कि इमारत के निर्माण की देखरेख कर रहे ठेकेदार ने मजदूरों की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। एफआईआर के मुताबिक, मजदूरों ने ठेकेदार को निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की खराब गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी। उन्होंने यह भी चेताया था कि इमारत की मौजूदा स्थिति एक और कंक्रीट स्लैब यानी छत का अतिरिक्त भार सहन करने में सक्षम नहीं है। इसके बावजूद कथित तौर पर निर्माण कार्य जारी रखा गया।
इस हादसे में जीवित बचे फिरोज नाम के एक मजदूर ने पुलिस को दिए बयान में ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। फिरोज के मुताबिक, निर्माण कार्य के दौरान ढांचे से जुड़ी खामियों और संभावित खतरे को लेकर ठेकेदारों को बार-बार आगाह किया गया था। मजदूरों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और इमारत की मजबूती पर भी सवाल उठाए थे। फिरोज ने आरोप लगाया कि चेतावनी देने के बावजूद ठेकेदारों ने काम रोकने या जरूरी बदलाव करने के बजाय निर्माण जारी रखने पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि ढांचे में जरूरी बदलाव किए गए तो निर्माण की लागत बढ़ जाएगी। इसी वजह से मजदूरों की आशंकाओं को नजरअंदाज किया गया।
जिंदा बचा मजदूर बोला- ठेकेदार को हमने दी थी चेतावनी
हिंदुस्तान टाइम्स (HT) को मिली एफआईआर की जानकारी के अनुसार, हादसे में जीवित बचे मजदूर फिरोज ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार को ढांचे की कमजोर स्थिति के बारे में पहले ही चेतावनी दी गई थी। फिरोज ने पुलिस से कहा, “हमने ठेकेदार को बताया था कि लिंटेल (छत का हिस्सा) अभी तक सूखा नहीं है। हमने यह भी कहा था कि इस पर दूसरा स्लैब नहीं डाला जा सकता।” फिरोज के मुताबिक, उसने ठेकेदार को यह भी बताया था कि मौजूदा ढांचे को सहारा देने के लिए अतिरिक्त सीमेंट और लकड़ी की जरूरत होगी। हालांकि, आरोप है कि ठेकेदार ने यह कहते हुए काम जारी रखने को कहा कि ऐसा करने से निर्माण की लागत बढ़ जाएगी।
दो लोगों को बनाया गया आरोपी
इस मामले में दर्ज एफआईआर में ताजुद्दीन और फुरकान को आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), धारा 290 (इमारत को गिराने या उसकी मरम्मत के संबंध में लापरवाही), धारा 125(a) और धारा 3(5) (समान आशय से किया गया आपराधिक कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अलग-अलग चरणों में हो रहा था इमारत का निर्माण
फिरोज के पुलिस को दिए बयान के मुताबिक, उसे और अन्य मजदूरों को ठेकेदारों ने करीब 70 वर्ग गज के प्लॉट पर निर्माण कार्य के लिए काम पर रखा था। उसने बताया कि इमारत का निर्माण अलग-अलग चरणों में किया जा रहा था और हादसे से पहले ही तीन कंक्रीट स्लैब यानी छतें डाली जा चुकी थीं।
पहले से बनी छत सूखी नहीं थी, बेहद कमजोर थी
फिरोज ने पुलिस को बताया कि मजदूर निर्माण की गुणवत्ता और इस्तेमाल किए जा रहे सीमेंट की मात्रा को लेकर चिंतित थे। उसके मुताबिक, पहले से डाली गई छत पूरी तरह सूखी नहीं थी और इतनी मजबूत भी नहीं थी कि वह एक और कंक्रीट स्लैब का भार सह सके। मजदूरों का मानना था कि मौजूदा ढांचे को पर्याप्त मजबूती देने के लिए अतिरिक्त सीमेंट, लकड़ी और अन्य निर्माण सामग्री की जरूरत थी। इसके बावजूद आरोप है कि ठेकेदारों ने उनकी चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए काम जारी रखने को कहा।
इमारत मालिकों को भी जानकारी देने की कोशिश
फिरोज ने अपने बयान में यह भी बताया कि मजदूरों ने निर्माण में आ रही समस्याओं को इमारत के मालिकों के संज्ञान में लाने की कोशिश की थी। हालांकि, निर्माण कार्य की जिम्मेदारी ठेकेदारों के पास होने के कारण मजदूरों ने उन्हें ही अपनी शिकायतों और आशंकाओं से अवगत कराया था।
इमारत गिरने के मामले में अब तक 3 ठेकेदार गिरफ्तार
चावड़ी बाजार में इमारत ढहने के मामले में दिल्ली पुलिस ने अब तक तीन ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि तीनों आरोपियों को हरियाणा के फरीदाबाद जिले की दौज तहसील के सिरोही गांव से गिरफ्तार किया गया। पुलिस उपायुक्त (मध्य) रोहित राजबीर सिंह के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सिराज, ताजुद्दीन और फुरकान के रूप में हुई है। तीनों अजमेरी गेट इलाके के रहने वाले हैं। हालांकि, फिलहाल उनके पूरे नामों की जानकारी सामने नहीं आई है।
सुबह 9:30 बजे हुआ था हादसा, पीछे होने के कारण बचा फिरोज
पुलिस के अनुसार, हादसा गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे हुआ। उस समय फिरोज और अन्य मजदूर इमारत में निर्माण कार्य कर रहे थे। इसी दौरान अचानक पूरी इमारत ढह गई और दो मजदूर मलबे के नीचे दब गए। फिरोज उस समय इमारत के पिछले हिस्से में काम कर रहा था। इसी वजह से वह हादसे में बच गया। बाद में उसने पुलिस को दिए बयान में निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदारों को दी गई चेतावनियों और इमारत की कमजोर स्थिति के बारे में विस्तार से बताया।
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