सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के दफ्तर के बाहर आज NSUI के कार्यकर्ताओं ने 10वीं-12वीं बोर्ड की परीक्षा की फीस में वृद्धि के विरोध में अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया। छात्र और कार्यकर्ताओं ने अपने घर से गुल्लक, प्रॉपर्टी दस्तावेज़ और कुछ जेवर लेकर आए और यह सवाल उठाया कि क्या अब इन सब को बेचकर अपने बच्चों को पढ़ाना पड़ेगा।

प्रदर्शन के दौरान परीक्षा शुल्क बढ़ाए जाने से नाराज NSUI के नेता हेमंतपाल ने कहा कि परीक्षा शुल्क 460 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये, जबकि आवेदन फॉर्म का शुल्क 80 रुपये से 200 रुपये कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि कुल 22 अलग-अलग मदों में फीस बढ़ाई गई है, जो सीधे गरीब परिवारों पर असर डालती है।

परीक्षा शुल्क बढ़ाए जाने को लेकर मा.शि.मं का आदेश

हेमंतपाल ने चेतावनी दी कि अगर फीस वृद्धि को वापस नहीं लिया गया और पुरानी दरें लागू नहीं की गईं, तो पहले अधिकारी-कक्ष में जाकर विरोध करेंगे और फिर स्थिति न सुधरी तो सड़क से लेकर विधानसभा तक आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “प्रदेश के गरीब परिवारों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। कई स्कूलों में शौचालय की कमी, शिक्षक की भारी कमी, और किताबें समय पर न पहुँचने जैसी समस्याएं हैं। ऐसे में फीस बढ़ाना न्यायसंगत नहीं है।

वहीं, माध्यमिक शिक्षा मंडल की सचिव पुष्पा साहू ने कहा कि पिछले पांच सालों में किसी भी मद में फीस वृद्धि नहीं हुई थी। यह निर्णय वित्त कमेटी ने लिया है। उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्यों से तुलना करें तो छत्तीसगढ़ में फीस वृद्धि के बाद भी अब भी फीस बहुत कम है।

छात्र और कार्यकर्ता प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों की मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए फीस वृद्धि को पुनर्विचार किया जाए।

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