रोहित कश्यप, मुंगेली। नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के गंभीर मामले में मुंगेली की एफ.टी.सी. अदालत ने अपने फैसले में अपराधी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी पीड़िता का जीजा, है। यह फैसला 13 जनवरी 2026 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सोम की अदालत द्वारा पारित किया गया, जबकि न्यायालय ने निर्णय 09 जनवरी 2026 को सुरक्षित रखा था।

बता दें कि मामला सिटी कोतवाली मुंगेली थाना अंतर्गत दर्ज अपराध से संबंधित है। आरोप निर्धारित करने की प्रक्रिया 9 दिसंबर 2024 को पूरी हुई थी और 17 जनवरी 2025 से साक्ष्य की सुनवाई प्रारंभ हुई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मोती लाल साहू और लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ने मामले की पैरवी प्रभावी एवं ठोस तरीके से अदालत में प्रस्तुत की।

न्यायालय ने सभी मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर यह पाया कि आरोपी ने 14 वर्ष की नाबालिग बालिका के साथ गंभीर लैंगिक अपराध किया। आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 65(1), 64(2)(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(सी)/6 और 4(2) के तहत दोषसिद्ध किया गया।

अदालत ने आरोपी को निम्नानुसार सजा सुनाई है:

  • धारा 4(2) पॉक्सो एक्ट: आजीवन कारावास एवं 2,000 रुपये अर्थदंड।
  • धारा 6 पॉक्सो एक्ट: आजीवन कारावास एवं 2,000 रुपये अर्थदंड।
  • अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में प्रत्येक अपराध में अलग-अलग 6 माह का सश्रम कारावास।

साथ ही अदालत ने आरोपी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत विचारण अवधि में बिताई गई निरोध अवधि का लाभ देने का आदेश दिया। आरोपी 09 अक्टूबर 2024 से न्यायिक अभिरक्षा में है और 9.10.2024 से 13.01.2026 तक कुल 1 वर्ष 3 माह 4 दिन की निरोध अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।

पीड़िता के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए अदालत ने छत्तीसगढ़ शासन की यौन उत्पीड़न पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत 5,00,000 रुपये मुआवजा, देने का आदेश दिया। इसमें से 1,00,000 रुपये पीड़िता के बैंक खाते में तत्काल जमा किए जाएंगे और शेष 4,00,000 रुपये पीड़िता के वयस्क होने तक राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा के रूप में सुरक्षित रखे जाएंगे।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने के आदेश दिए। पीड़िता का नाम, पता, फोटो या परिवार से संबंधित कोई भी जानकारी प्रकाशित करना कानूनन दंडनीय होगा।

इसके अलावा न्यायालय ने आदेश दिया कि निर्णय की प्रति आरोपी को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी, सजा वारंट जारी कर आरोपी को जिला जेल मुंगेली भेजा जाएगा, और निर्णय की प्रतिलिपि लोक अभियोजक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला मजिस्ट्रेट और जेल अधीक्षक को आवश्यक अनुपालन के लिए प्रेषित की जाएगी।

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