रायपुर। महज़ चमकती सड़कों, व्यवस्थित बाजारों और साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थलों से नहीं बनते स्वच्छ और सुंदर शहर। सुंदर शहर उन हजारों हाथों के सम्मान और सुरक्षा से बनते हैं जो प्रतिदिन समाज को स्वच्छ रखने के लिए अपना बेशक़ीमती योगदान देते हैं। सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई जैसे जोखिम से भरे काम करने वाले स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा इसी संवेदनशील सोच का शानदार परिणाम है।

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जन-जन के ‘विष्णु भैय्या’ के नेतृत्व में सुशासन प्रशासनिक दक्षता के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा पहुंचाना भी है। इसी का नतीजा है कि केंद्र सरकार की नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम यानी ‘नमस्ते’ (NAMASTE) योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने आंध्रप्रदेश, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तरप्रदेश और पुडुचेरी के साथ संयुक्त रूप से देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

यह उपलब्धि उस सोच की जीत है जिसमें स्वच्छता कर्मी को सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों से संपन्न नागरिक माना जाता है।

विष्णु भैय्या के सुशासन में संवेदनाओं को बनाई नीति की ताकत

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कार्यशैली में संवेदनशीलता और जनकल्याण का विशेष महत्व दिखाई देता है। ‘नमस्ते’ योजना की सफलता इसी दृष्टिकोण को मजबूत करने वाली है। सरकार ने स्वच्छता व्यवस्था को केवल सफाई तक सीमित न रखते हुए इसे सुरक्षित रोजगार, स्वास्थ्य सुरक्षा, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन से जोड़ा है। सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतों को शून्य करना ही ‘नमस्ते’ का मूल उद्देश्य है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जोखिमपूर्ण मैनुअल सफाई को समाप्त कर आधुनिक मशीनों के माध्यम से सफाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। यानी उद्देश्य केवल शहरों को साफ रखना ही नहीं बल्कि सफाई करने वाले व्यक्ति को भी सुरक्षित रखना ही है। यही होती है किसी भी संवेदनशील सरकार की पहचान।

आंकड़े ही बता रहे उपलब्धि की गंभीरता

छत्तीसगढ़ में अब तक 1,487 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों का सर्वेक्षण किया गया है जिनमें से 1,465 कर्मियों का सत्यापन हो चुका है। इस प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि किसी भी कल्याणकारी योजना का वास्तविक लाभ तभी संभव है जब उसके वास्तविक हितग्राहियों की पहचान सुनिश्चित हो। इसी तरह प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में 1,428 स्वच्छता कर्मियों को PPE किट उपलब्ध कराई जा चुकी है।स्वच्छता कर्मियों को उपलब्ध यह सुरक्षा उपकरण जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मियों के लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं।

स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया गया है। 1,374 स्वच्छता कर्मियों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं इसका आशय यही है कि स्वच्छता कर्मियों के स्वास्थ्य को भी सरकारी प्राथमिकता के केंद्र में रखा गया है। इसके साथ ही 139 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया और 923 स्वच्छता कर्मियों को कार्यशालाओं के माध्यम से सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

मशीनों से सफाई देंगी हर जोखिम से मुक्ति

नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम यानी ‘नमस्ते’ योजना की सबसे महत्वपूर्ण है स्वच्छता कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देना। जिस काम में इंसानी जीवन को खतरा हो, वहां आधुनिक तकनीक का उपयोग, सुविधा नहीं बल्कि जिम्मेदारी है। इसी दिशा में आगे बढ़कर छत्तीसगढ़ में 47 Emergency Response Sanitation Units यानी ERSU स्थापित की गई हैं। इनमें 14 नगर निगम, 24 जिला मुख्यालय और 9 द्वितीय सर्वाधिक जनसंख्या वाले नगरीय निकायों को शामिल किया गया है। इनमें से 39 ERSU को सुरक्षा किट भी उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। ERSU और 14420 हेल्पलाइन के माध्यम से आपातकालीन स्वच्छता सेवाओं के लिए त्वरित और सुरक्षित प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित की जा रही है। यह तमाम व्यवस्था इस तरफ़ इशारा है कि छत्तीसगढ़ स्वच्छता को अब पारंपरिक व्यवस्था से आगे ले जाकर आधुनिक आपातकालीन सेवा तंत्र से जोड़ रहा है।

स्वच्छता कर्मचारी- स्वच्छता उद्यमी बनने की दिशा में अग्रसर

इस योजना का एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि स्वच्छता कर्मियों को केवल श्रमिक के रूप में देखने के स्थान पर उन्हें Sanitation Entrepreneurs के रूप में विकसित करने के विषय में विचार किया जा रहा है। मशीनीकरण का वास्तविक लाभ तब और भी व्यापक होगा जब सफाई कर्मी स्वयं आधुनिक मशीनों के मालिक और संचालक बनेंगे। इससे सफाई कर्मियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे आय में वृद्धि की संभावनाएं बढ़ेंगी और उनका सामाजिक सम्मान भी बढ़ेगा। इस सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भरता की विचारधारा और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनकल्याणकारी सोच के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में देखी जा सकती है।

वेस्ट पिकर्स भी जुड़ेंगे मुख्यधारा से

‘नमस्ते’ योजना का दायरा वृहद् है। यह केवल सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों तक ही सीमित नहीं है। कचरा बीनने वाले वेस्ट पिकर्स को भी सामाजिक सुरक्षा और सम्मान की मुख्यधारा से जोड़ने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में 8,527 वेस्ट पिकर्स की प्रोफाइलिंग की गई है जिनमें से 6,799 का सत्यापन किया जा चुका है। इनमें 991 वेस्ट पिकर्स को PPE किट और 512 को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा शेष कर्मियों को भी प्रशिक्षण देने की तैयारी चल रही है। यह शासकीय पहल बताती है कि स्वच्छता व्यवस्था में योगदान देने वाला कोई भी व्यक्ति सरकार की दृष्टि से अदृश्य नहीं है।

‘स्वच्छता दीदी’ बन रही छत्तीसगढ़ की पहचान

छत्तीसगढ़ राज्य की स्वच्छता यात्रा में ‘स्वच्छता दीदियों’ ने भी महती भूमिका निभाई हैं। घर-घर से कचरा संग्रहण, कचरे का पृथक्करण और उसके प्रसंस्करण में ‘स्वच्छता दीदियों’ की सक्रिय भागीदारी ने राज्य के स्वच्छता मॉडल को जनभागीदारी का स्वरूप दिया है। स्वच्छता को केवल सरकारी विभाग का दायित्व न मानते हुए इसे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बनाना चाहिए। सामूहिक प्रयास किसी भी अभियान के लिए स्थायी सफलता की कुंजी होती है। छत्तीसगढ़ की साय सरकार के सुशासन में राज्य ने इस दिशा में उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए ‘स्वभाव स्वच्छता संस्कार स्वच्छता’ जैसी पहल के माध्यम से Garbage Vulnerable Points को मुक्त करने और सार्वजनिक शौचालयों के कायाकल्प का प्रयास किया जा रहा है।

स्वच्छ शहरों को मिल रही नई पहचान

छत्तीसगढ़ ने स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। अंबिकापुर, पाटन और बिश्रामपुर जैसे शहरों का देश की नई ‘Super Swachh League’ में शामिल होना राज्य की स्वच्छता यात्रा की उपलब्धियों को रेखांकित करता है। अंबिकापुर का कचरा प्रबंधन मॉडल पहले ही देशभर में चर्चा का विषय रहा है। अब अन्य शहरों में भी स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर नए प्रयोग किए जा रहे हैं। राजधानी रायपुर में शुरू की गई ‘JOSH’ पहल भी इसी दिशा में एक कदम है, जिसके माध्यम से स्वच्छता प्रहरियों को आधुनिक किट उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण स्वच्छता और स्थानीय रोजगार को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

जल संरक्षण में भी जनभागीदारी का शानदार मॉडल

छत्तीसगढ़ की उपलब्धियां केवल स्वच्छता तक सीमित न रहते हुए जल संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। ‘कैच द रेन’ और ‘जल संचय जनभागीदारी’ अभियान में राज्य का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी सराहा गया। कोरिया जिले का ‘5 प्रतिशत मॉडल’ इसके प्रेरक उदाहरण बने हैं जहां किसान अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के लिए स्वेच्छा से समर्पित कर रहे हैं। यह सफल प्रयोग बताता है कि छत्तीसगढ़ में विकास की अवधारणा केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है। राज्य में जनभागीदारी को विकास की शक्ति बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

‘नमस्ते दिवस’ ने बढ़ाया सम्मान का भाव

इस वर्ष 14 जुलाई को प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में ‘नमस्ते दिवस’ का आयोजन किया गया था, जिसमें 15 हजार से अधिक स्वच्छता कर्मियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों और नागरिकों ने हिस्सा लिया था। ‘नमस्ते दिवस’ में स्वच्छता कर्मियों का स्वास्थ्य परीक्षण, व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण, सम्मान तथा PPE किट और आयुष्मान कार्ड का वितरण किया गया। यह आयोजन एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी देता है जो लोग हमारे शहरों को स्वच्छ रखते हैं और उनके सम्मान की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। इस उपलब्धि का सबसे बड़ा महत्व यही है कि समाज में एक संदेश स्वमेव जा रहा है कि यह एक निरंतर यात्रा का हिस्सा है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना निश्चित रूप से गर्व का विषय है लेकिन असली सफलता उस दिन मानी जाएगी जिस दिन सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान किसी स्वच्छता कर्मी की जान जोखिम में न पड़े।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य के दुलारे विष्णु भैय्या के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसमें स्वच्छता के साथ सम्मान, विकास के साथ संवेदना और तकनीक के साथ मानवीय सुरक्षा को महत्व दिया जा रहा है। नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम यानी ‘नमस्ते’ (NAMASTE) योजना में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान इसलिए विशेष है, क्योंकि यह सिर्फ एक सरकारी योजना की सफलता नहीं बल्कि उस विचार की सफलता है जिसमें स्वच्छता कर्मी भी विकास की मुख्यधारा के बराबर के भागीदार हैं। छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि संदेश देती है कि जब सरकार की नीति में संवेदना, प्रशासन में प्रतिबद्धता और समाज में जनभागीदारी जुड़ती है तब स्वच्छता केवल अभियान नहीं रहती बल्कि वह संस्कार, सम्मान और सुरक्षित भविष्य का संकल्प बन जाती है।